सीजी भास्कर, 08 फरवरी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम चिरहुला निवासी दिव्यांग राजेश कुमार पटेल ने यह साबित (Government Skill Training) कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और शासन की योजनाएं मिल जाएं, तो आत्मनिर्भरता दूर नहीं रहती। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और आज सम्मानजनक आजीविका के साथ अपने परिवार को स्थिर जीवन दे रहे हैं।
राजेश कुमार पटेल ने सत्र 2023–24 में शासकीय आश्रयदत्त कर्मशाला तिफरा से इलेक्ट्रिकल व्यवसाय का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी ज्ञान के साथ आत्मविश्वास भी दिया, जिससे वे स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सके।
प्रशिक्षण ने बदली आमदनी की तस्वीर
प्रशिक्षण से पहले राजेश कुमार पटेल एक छोटी पान दुकान के जरिए परिवार का भरण-पोषण (Government Skill Training) कर रहे थे, जिससे आय सीमित थी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्होंने अपने घर से ही इलेक्ट्रिकल मरम्मत कार्य शुरू किया। वर्तमान में वे टेबल फैन, सीलिंग फैन, कूलर, मिक्सर-ग्राइंडर, हीटर, टेबल लैम्प और इन्वर्टर जैसे घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत कर रहे हैं।
इस कार्य से अब उनकी दैनिक आय 500 से 1500 रुपये तक पहुंच गई है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि परिवार का जीवन स्तर भी पहले की तुलना में बेहतर हुआ है।
आत्मसम्मान के साथ नई पहचान
आत्मनिर्भर बनने के बाद राजेश कुमार पटेल को समाज में नई पहचान और आत्मसम्मान (Government Skill Training) मिला है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय राज्य शासन और समाज कल्याण विभाग को देते हुए कहा कि विभाग द्वारा संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण योजनाओं ने उन्हें सम्मानजनक रोजगार का अवसर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि दिव्यांगजनों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे भी समाज की मुख्यधारा में मजबूती से योगदान दे सकते हैं। उनकी कहानी न सिर्फ प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि आत्मनिर्भर भारत की नींव जमीनी स्तर पर ऐसे ही प्रयासों से मजबूत होती है।




