सीजी भास्कर, 08 फरवरी। शिक्षक युक्तियुक्तकरण के दौरान महिला शिक्षिका की पदस्थापना को लेकर Chhattisgarh High Court ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी (Teacher Transfer Case) जताई है। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए डीईओ विजय टांडे को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार, चित्ररेखा तिवारी शासकीय कन्या माध्यमिक शाला, तारबहार में प्रधानपाठिका के पद पर पदस्थ थीं। शिक्षक युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत उनका स्थानांतरण शासकीय माध्यमिक शाला, गतौरा (विकासखंड मस्तूरी) कर दिया गया। हालांकि, वहां पहले से ही प्रधानपाठक पदस्थ होने के कारण वे पुरानी शाला में ही कार्य करती रहीं।
आदेश नहीं मिला, मानसिक तनाव में पहुंचीं कोर्ट
इस स्थिति को देखते हुए शिक्षिका का अभ्यावेदन स्वीकार किया (Teacher Transfer Case) गया और उन्हें अन्यत्र पदस्थ किए जाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन लंबे समय तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ। मानसिक रूप से परेशान होकर चित्ररेखा तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जो 31 जनवरी को पंजीबद्ध हुई।
याचिका दायर होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से आनन-फानन में एक नया आदेश जारी किया गया, जिसमें चित्ररेखा तिवारी को शासकीय माध्यमिक शाला, फरहदा में पदस्थ दर्शाया गया। सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह आदेश 30 जनवरी को जारी किया गया था।
बैकडेट आदेश पर कोर्ट सख्त
जब पदस्थापना आदेश न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो याचिकाकर्ता की ओर से गंभीर आपत्ति (Teacher Transfer Case) उठाई गई। 6 फरवरी की सुनवाई में अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि याचिका में दर्ज केस नंबर 31 जनवरी का है, जबकि पदस्थापना आदेश को 30 जनवरी का बताया जा रहा है। इससे स्पष्ट हुआ कि आदेश बैकडेट में तैयार कर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
इस पर नाराज Chhattisgarh High Court ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को 11 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि बैकडेट आदेश क्यों जारी किया गया और उसे अदालत में क्यों प्रस्तुत किया गया।




