सीजी भास्कर 15 फरवरी बिलासपुर। मुंगेली जिले के ग्राम टेढ़ाधौरा से निकलकर सुप्रिया ठाकुर ने वह मुकाम हासिल किया है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा बन सकता है। (Mungeli Daughter Indian Army Lieutenant) के रूप में चयनित होकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी सुप्रिया आज भारतीय सेना में अधिकारी बनने जा रही हैं, जो पूरे अंचल के लिए गर्व की बात है।
देशभर में टॉप रैंक से किया कमाल
सुप्रिया ठाकुर का चयन (Indian Army SSC Tech Entry) के अंतर्गत हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स स्ट्रीम में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-4 हासिल कर यह दिखा दिया कि मेहनत सही दिशा में हो, तो नतीजे खुद बोलते हैं। 17 एसएसबी बोर्ड, बेंगलुरु से मिली अनुशंसा ने उनके सपनों को हकीकत में बदल दिया।
पढ़ाई से लेकर परेड ग्राउंड तक की तैयारी
शुरुआती पढ़ाई बिलासपुर स्थित सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हायर सेकेंड्री स्कूल से करने के बाद सुप्रिया ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में उनका झुकाव अनुशासन और नेतृत्व की ओर बढ़ता गया। यही वह दौर था, जब उन्होंने (Women Officer Indian Army) बनने का लक्ष्य अपने मन में पक्का कर लिया।
NCC ने दिखाया वर्दी का रास्ता
एनसीसी ‘C’ सर्टिफिकेट के दौरान सुप्रिया को सेना की जीवनशैली को करीब से देखने का मौका मिला। परेड, कैंप और ट्रेनिंग के अनुभवों ने उनके भीतर देशसेवा की भावना को और मजबूत कर दिया। उन्होंने खुद माना कि एनसीसी के अनुभवों ने ही उन्हें (Chhattisgarh Army Officer) बनने का आत्मविश्वास दिया।
परिवार का सहारा बना ताकत
सुप्रिया की इस सफलता के पीछे परिवार का मजबूत समर्थन रहा। माता-पिता और भाई ने हर चरण में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव टेढ़ाधौरा से निकलकर बिलासपुर में पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन परिवार ने कभी उनके सपनों को छोटा नहीं होने दिया।
क्षेत्र में खुशी, युवाओं के लिए प्रेरणा
सुप्रिया की उपलब्धि की खबर फैलते ही पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के युवाओं में एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग अब यह मानने लगे हैं कि प्रतिभा शहर या बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती — सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो रास्ता खुद बनता है।
ट्रेनिंग एकेडमी से देशसेवा तक
अब सुप्रिया ट्रेनिंग एकेडमी में कठिन प्रशिक्षण से गुजरेंगी। आगे का सफर चुनौतीपूर्ण जरूर होगा, लेकिन उनका जज़्बा और तैयारी यह दिखाती है कि वह हर कसौटी पर खरा उतरेंगी। गांव की बेटी का यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद की नई रोशनी बनकर सामने आया है।





