राजधानी रायपुर के लाभांडी क्षेत्र स्थित आबकारी भवन में देर रात अचानक आग लगने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। जिस मंजिल पर आग भड़की, वहीं विभाग से जुड़ा अहम रिकॉर्ड रूम मौजूद था। Excise Office Fire Case के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था आखिर कितनी मजबूत थी।
ऑडिट से ठीक पहले जले दस्तावेज, समय पर उठे सवाल
घटना का समय कई सवाल खड़े करता है। जानकारी के मुताबिक, जिस सेक्शन में आग लगी, वहीं विभागीय आय-व्यय से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे, जिनका ऑडिट प्रस्तावित था। दिनभर तैयारियां चलने के बाद रात में अचानक आग लगना महज़ संयोग था या किसी लापरवाही का नतीजा, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को Excise Office Fire Case के संदर्भ में गंभीरता से देखा जा रहा है।
वेतन कटौती और वित्तीय गड़बड़ियों पर उभरे नए संदेह
विभाग से जुड़े कर्मचारियों के बीच लंबे समय से वेतन कटौती और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर असंतोष की बातें सामने आती रही हैं। आग की घटना के बाद इन आशंकाओं को और बल मिला है। सवाल उठ रहा है कि वेतन में कटौती किन निर्देशों पर हुई और उस राशि का उपयोग कहां किया गया।
Excise Office Fire Case ने इन पुराने मुद्दों को फिर से सतह पर ला दिया है।
दमकल की देरी से बढ़ा नुकसान, रिकॉर्ड रूम को भारी क्षति
आग की सूचना मिलने के बाद दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक रिकॉर्ड रूम को भारी नुकसान हो चुका था। कई फाइलें और कागज़ात पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए। प्राथमिक तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, मगर आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
मौके पर पहुंची जांच एजेंसियां हर एंगल से पड़ताल कर रही हैं ताकि Excise Office Fire Case की असल वजह सामने आ सके।
निष्पक्ष जांच की मांग, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
इस घटना के बाद निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा शुरू हो चुकी है कि रिकॉर्ड की सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। आग की घटना के पीछे तकनीकी कारण हैं या मानवीय लापरवाही, इसका सच सामने लाना अब जरूरी हो गया है।
Excise Office Fire Case आने वाले दिनों में कई अहम खुलासों का आधार बन सकता है।





