सीजी भास्कर, 17 फरवरी। राजधानी के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मल्टीलेवल पार्किंग से 36 लाख 50 हजार रुपये की कथित उठाईगिरी (Raipur 36.50 Lakh Theft Case) का मामला महज 24 घंटे में सुलझ गया। जांच में सामने आया कि एफसीआई अधिकारी के साथ आया उसका ही दोस्त साजिश का मास्टरमाइंड था। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरी रकम बरामद कर ली है। छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले का खुलासा डीसीपी सेंट्रल जोन उमेश गुप्ता ने किया।
ऐसे रची गई झूठी चोरी की कहानी
एफसीआई अधिकारी ज्ञानप्रकाश पांडे 16 फरवरी को जमीन की रजिस्ट्री के लिए 36.50 लाख रुपये लेकर कलेक्ट्रेट (Raipur 36.50 Lakh Theft Case) पहुंचे थे। उन्होंने कार की चाबी अपने मित्र नितिन सोनी को देकर रजिस्ट्री कार्यालय चले गए। कुछ देर बाद नितिन ने फोन कर बताया कि कार में रखा पैसों से भरा बैग चोरी हो गया है।
संदेह होने पर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी विश्लेषण के जरिए जांच शुरू की। फुटेज में कार के पास एक स्कूटी सवार संदिग्ध दिखा। पूछताछ में नितिन बार-बार बयान बदलता रहा।
रिक्रिएशन में खुला राज
घटनास्थल का रिक्रिएशन कराने पर साजिश का खुलासा हुआ। नितिन सोनी ने अपने साथी तनवीर आलम के साथ मिलकर रकम हड़पने की योजना बनाई थी। कर्ज में डूबे नितिन ने अपने दोस्त के भरोसे का फायदा उठाया और कार से रकम निकलवा ली।
इस काम के बदले तनवीर को 2 लाख रुपये देने की डील हुई थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर 36.50 लाख रुपये बरामद (Raipur 36.50 Lakh Theft Case) कर लिए हैं। मामले में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
भरोसे का विश्वासघात
पुलिस के मुताबिक, आरोपी और पीड़ित के बीच लंबे समय से मित्रता थी। पूर्व में जमीन के लेन-देन में साथ जाने के दौरान ही आरोपी को रकम की जानकारी मिली थी। उसी दौरान साजिश की नींव रखी गई। तेजी से कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मामले का खुलासा कर दिया, जिससे संभावित बड़ी आपराधिक साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया।





