सीजी भास्कर, 20 फरवरी | धरसींवा विकासखंड के दौरे पर डॉ. गौरव सिंह ने प्राथमिक शालाओं में बच्चों से सीधे बातचीत की और मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को मौके पर परखा। अधिकारियों के साथ निरीक्षण के दौरान उन्होंने पढ़ाई की स्थिति, कक्षा की गतिविधियों और भोजन की नियमितता पर संक्षिप्त सवाल-जवाब किए, ताकि (Raipur Collector School Inspection) के जरिए जमीनी तस्वीर साफ हो सके।
कांदुल स्कूल में मध्यान्ह भोजन की जांच
शासकीय प्राथमिक शाला कांदुल में जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के साथ कलेक्टर ने मध्यान्ह भोजन का स्वाद लिया। रसोईघर की स्वच्छता, मेन्यू की नियमितता और बच्चों को मिलने वाली मात्रा पर चर्चा हुई। उन्होंने स्कूल में चल रहे मरम्मत कार्य को तय समयसीमा में, बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के निर्देश दिए—यह भी (Raipur Collector School Inspection) का अहम हिस्सा रहा।
सेजबहार स्कूल में पढ़ाई की पड़ताल
शासकीय प्राथमिक शाला सेजबहार में कलेक्टर ने बच्चों की कॉपियां देखीं, उनसे पूछा कि कक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है और रोज़ का भोजन क्या मिलता है। शिक्षकों को सीखने के नतीजों पर ध्यान देने, उपस्थिति बढ़ाने और अभिभावकों से संवाद मजबूत करने की सलाह दी गई। निरीक्षण के दौरान (Raipur Collector School Inspection) के तहत कक्षा-कक्ष की व्यवस्थाओं पर भी फीडबैक दिया गया।
मत्स्य केंद्र में 17 टन मासिक उत्पादन
सेजबहार के मत्स्य पालन केंद्र में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत चल रही गतिविधियों की जानकारी ली गई। यहां पांच नर्सरी और चार तालाबों में तैयार किए गए बीज तालाबों में डाले जाते हैं, जिससे हितग्राहियों के अनुसार हर महीने लगभग 17 टन उत्पादन हो रहा है। कलेक्टर ने जल संरक्षण, तालाबों की मेड़बंदी और पौधरोपण बढ़ाने पर ज़ोर देते हुए (Raipur Collector School Inspection) के दौरान उत्पादन-गुणवत्ता सुधार की दिशा बताई।
कृत्रिम गर्भाधान केंद्र की समीक्षा
सेजबहार स्थित कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र में इस वित्तीय वर्ष अब तक 1,047 पशुओं में एआई कराए जाने और करीब 450 उच्च नस्ल के बछड़े-बछियों के जन्म की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने टीकाकरण शेड्यूल की समीक्षा की और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के लिए नियमित अभियान चलाने को कहा, ताकि (Raipur Collector School Inspection) का लाभ पशुपालकों तक स्थायी रूप से पहुंचे।
योजनाओं का असर जमीन पर दिखे
दौरे के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्कूलों में पोषण-गुणवत्ता, मत्स्य उत्पादन में संसाधन-प्रबंधन और पशुपालन में सेवा-कवरेज—तीनों मोर्चों पर मॉनिटरिंग मजबूत हो। कलेक्टर ने कहा कि योजनाओं का असर तभी दिखेगा, जब फील्ड-लेवल पर जवाबदेही तय होगी और नियमित फॉलो-अप होगा—यही (Raipur Collector School Inspection) का असल मकसद है।






