रायगढ़ शहर के Raigarh के इंदिरा नगर–चांदनी चौक कॉरिडोर में प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना को लेकर आयोजित Raigarh Flyover Public Hearing में शुरुआती दौर से ही विरोध के स्वर सुनाई देने लगे। प्रभावित परिवारों और दुकानदारों का कहना था कि परियोजना से जुड़े कई लोगों तक आधिकारिक सूचना समय पर नहीं पहुंची, जिससे वे अपनी आपत्तियां दर्ज नहीं कर सके। स्थानीय नागरिकों ने इसे पारदर्शिता की कमी बताते हुए प्रशासन से जवाब मांगा।
परियोजना की रूपरेखा और लागत का खुलासा
नगर निगम की ओर से बताया गया कि इंदिरा नगर से जोगीडीपा होते हुए मरीन ड्राइव तक सड़क चौड़ीकरण के साथ फ्लाईओवर का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पुल की अनुमानित लंबाई करीब 90 मीटर और चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है, जबकि दोनों ओर एप्रोच रोड विकसित करने की योजना है। प्रशासन के मुताबिक इस पूरे पैकेज पर लगभग 12 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है, हालांकि प्रभावितों ने लागत के साथ पुनर्वास नीति की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग रखी।
भू-अर्जन और पुनर्वास पर असमंजस
केवड़ाबाड़ी स्थित मंगल भवन में लगाए गए समाधान शिविर में भू-अर्जन से जुड़े दस्तावेजों पर चर्चा हुई। प्रभावितों का आरोप रहा कि जिन पट्टाधारियों के नाम प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं, वे मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि वास्तविक रूप से मार्ग पर रहने वाले कई परिवार और दुकानदार सामने आकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे थे। लोगों ने मांग की कि या तो जमीन के बदले जमीन दी जाए या फिर बाजार दर पर मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
Raigarh Flyover Public Hearing: दुकानदारों की आजीविका पर मंडराया संकट
चांदनी चौक क्षेत्र में वर्षों से कारोबार कर रहे छोटे व्यापारियों ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण से उनकी दुकानें सीधे प्रभावित होंगी। उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाया जाना रोज़ी-रोटी पर सीधा प्रहार होगा। कई लोगों ने यह सुझाव भी दिया कि सड़क की चौड़ाई में व्यावहारिक संशोधन कर नुकसान कम किया जा सकता है, ताकि स्थानीय व्यवसाय बच सकें।
आपत्तियों का रिकॉर्ड और आगे की प्रक्रिया
जनसुनवाई में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कुल पांच लिखित आपत्तियां दर्ज की गईं। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सभी आपत्तियों को जिला प्रशासन के स्तर पर संज्ञान में लिया जाएगा और अंतिम निर्णय से पहले प्रभावितों के साथ पुनः संवाद किया जाएगा। स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी परियोजना के सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment) को सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
सूचना तंत्र पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि परियोजना से प्रभावित होने वाले लगभग 15 दुकानों और मकानों तक समय पर सूचना नहीं पहुंची। कई लोगों का कहना है कि अगर पूर्व सूचना मिलती, तो वे अपने दस्तावेज़ और आपत्तियों के साथ जनसुनवाई में शामिल हो सकते थे। नागरिकों ने भविष्य में किसी भी शहरी परियोजना से पहले प्रभावी सूचना तंत्र लागू करने की मांग रखी।






