सीजी भास्कर 21 फ़रवरी जगदलपुर। Anti-Naxal Operation Gadchiroli के तहत छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा से सटे गढ़चिरौली क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने निर्णायक कार्रवाई की। संयुक्त दस्ते ने नक्सली नेटवर्क से जुड़े 44 प्रतीकात्मक स्मारकों को एक साथ हटाया। अधिकारियों के मुताबिक यह कदम (area dominance) बढ़ाने और कट्टर प्रचार की जड़ों पर चोट करने की रणनीति का हिस्सा है।
सी-60, सीआरपीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस अभियान में महाराष्ट्र पुलिस की विशेष इकाई सी-60, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जिला पुलिस ने समन्वय के साथ मोर्चा संभाला। लंबे समय से खड़े इन ढांचों को नक्सल प्रभाव का प्रतीक माना जाता रहा है। बलों ने इलाके की घेराबंदी कर (joint security action) के तहत चरणबद्ध ढंग से स्मारकों को ध्वस्त किया, ताकि किसी भी तरह की उकसावे वाली गतिविधि को जगह न मिले।
युवाओं को बहकाने वाले प्रतीकों पर रोक
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इन ढांचों का इस्तेमाल स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने और संगठन के महिमामंडन के लिए किया जाता था। कार्रवाई का मकसद (counter propaganda) के जरिए कट्टर नैरेटिव को कमजोर करना और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना है। सुरक्षा एजेंसियों ने गांव-स्तर पर संवाद बढ़ाने और भरोसे का माहौल बनाने की बात भी कही।
योजनाबद्ध अभियान से बढ़ी प्रशासनिक पकड़
अभियान से पहले इलाके का सुरक्षा आकलन किया गया, फिर सीमित समय में कार्रवाई पूरी की गई। अधिकारियों का कहना है कि इससे (administrative grip) मजबूत होगी और सीमावर्ती पट्टी में नियमित गश्त के लिए बेहतर आधार तैयार होगा। स्थानीय निवासियों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसा बढ़ा है।
विकास के रास्ते खोलने की कोशिश
राज्य में नक्सल विरोधी अभियान तेज़ होने के साथ सड़क, संचार और जनसेवाओं तक पहुंच बेहतर करने की योजना पर काम जारी है। सुरक्षा बलों का मानना है कि (peace and development) साथ-साथ आगे बढ़ेंगे तो उग्रवाद की जमीन स्वतः कमजोर होगी।






