सीजी भास्कर 21 फ़रवरी सक्ती। Sakti Toll Plaza Illegal Collection को लेकर लगातार आ रही शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने औचक जांच की। कलेक्टर के मौके पर पहुंचते ही (ground reality check) में कई खामियां सामने आईं। वाहन चालकों से तय दर से ज्यादा वसूली और कर्मचारियों का असहयोग शिकायतों की सूची में दर्ज पाया गया, जिससे टोल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए।
सुविधाओं का अभाव, गाइडलाइन हवा-हवाई
निरीक्षण में सामने आया कि टोल प्लाजा पर यात्रियों के लिए अनिवार्य सुविधाएं बेहद कमजोर स्थिति में हैं। (user amenities) के नाम पर पीने का पानी, शौचालय, एम्बुलेंस और टो-वाहन की व्यवस्था मौके पर नदारद मिली। यह सीधे तौर पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मानकों की अनदेखी है, जिनका पालन टोल ऑपरेटर के लिए अनिवार्य होता है।
मैनेजर के बयान से बढ़ा विवाद
टोल मैनेजर के “हमें सिर्फ वसूली की जिम्मेदारी है” जैसे बयान ने हालात को और गंभीर बना दिया। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, (compliance failure) की यह स्वीकारोक्ति नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है। कलेक्टर ने मौके पर ही कड़ी नाराज़गी जताई और पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए।
छूट के नाम पर अपने नियम, राजस्व को चोट
टोल टैक्स में छूट को लेकर दिए गए जवाब भी चौंकाने वाले रहे। कुछ प्रभावशाली लोगों को नियमों से बाहर जाकर छूट देने की बात सामने आई, जो (revenue leakage) की ओर संकेत करती है। यह न सिर्फ शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आम वाहन चालकों के साथ असमान व्यवहार को भी बढ़ावा देता है।
प्रशासन का एक्शन मोड, एनएचएआई को पत्र
निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को पत्र भेजने की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि (penal action) के तहत दोषियों पर कार्रवाई तय होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताएं दोबारा न हों।






