Custodial Death Ramanujganj: रामानुजगंज जिला जेल में बंद 42 वर्षीय विचाराधीन कैदी की मौत ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। मृतक विष्णु कुमरिया, ग्राम सीतारामपुर पाट (थाना पस्ता) का निवासी था और एक हत्या प्रकरण में न्यायिक हिरासत में बंद था। शुक्रवार शाम पेट दर्द और दस्त की शिकायत के बाद उसे तत्काल 100 बिस्तर अस्पताल ले जाया गया, इलाज के बाद वापस जेल लाया गया, लेकिन अगले दिन सुबह हालत फिर बिगड़ गई।
24 घंटे में दो बार अस्पताल, दूसरी बार में घोषित हुई मौत
सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 9:45 बजे कैदी की तबीयत अचानक ज्यादा खराब होने की सूचना मिली। जेल प्रशासन ने बिना देरी किए उसे दोबारा अस्पताल पहुंचाया, जहां सुबह करीब 10:30 बजे चिकित्सकों ने मृत्यु की पुष्टि की। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि परीक्षण के दौरान मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और आवश्यक मेडिकल प्रोटोकॉल अपनाए गए।
जेल प्रशासन और अस्पताल की अलग-अलग व्याख्या
जेल प्रशासन का पक्ष है कि शिकायत मिलते ही समय पर अस्पताल भेजा गया। वहीं अस्पताल की ओर से बताया गया कि मरीज पहले से डिहाइड्रेशन और पेट से जुड़ी गंभीर परेशानी में था। दोनों पक्षों के बयानों के बीच परिजनों और स्थानीय लोगों में कई सवाल उठ रहे हैं—क्या समय पर उपचार पर्याप्त था, और क्या जेल के भीतर प्रारंभिक देखरेख में कोई चूक हुई?
परिजनों को सूचना, पोस्टमार्टम के बाद खुलेगा राज
घटना की जानकारी मृतक के परिजनों और वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। समाचार लिखे जाने तक परिजन अस्पताल नहीं पहुंच सके थे, जिससे पोस्टमार्टम प्रक्रिया में देरी हुई। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय रिकॉर्ड के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएंगे।
मजिस्ट्रियल जांच से तय होगी जवाबदेही
प्रशासन ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के दायरे में जेल के भीतर दी गई प्राथमिक चिकित्सा, अस्पताल ले जाने में लगा समय, और उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाएं शामिल होंगी। रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।






