सीजी भास्कर, 21 फरवरी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी ठहराने के फैसले के पीछे भारतीय मूल के प्रख्यात वकील नील कात्याल (Neal Katyal Biography) की अहम भूमिका रही है। उन्होंने छोटे कारोबारियों की ओर से अदालत में प्रभावशाली पैरवी करते हुए इस फैसले को उनके पक्ष में करवाया, जिसे कानून और संवैधानिक व्यवस्था की बड़ी जीत माना जा रहा है।
नील कात्याल अमेरिका के जाने-माने संवैधानिक विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 1970 में शिकागो में हुआ था। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनकी मां बाल रोग विशेषज्ञ और पिता इंजीनियर थे। भारतीय मूल से जुड़ाव के बावजूद कात्याल ने अमेरिकी न्याय प्रणाली में अपनी अलग पहचान बनाई और आज वे देश के सबसे प्रभावशाली वकीलों में शामिल हैं।
कात्याल ने अदालत में दलील दी कि राष्ट्रपति को संविधान से ऊपर नहीं रखा जा सकता और किसी भी आर्थिक निर्णय को कानून के दायरे में ही लिया (Neal Katyal Biography) जाना चाहिए। अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए टैरिफ को अवैध करार दिया। फैसले के बाद कात्याल ने इसे संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की जीत बताया।
नील कात्याल इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सामने बहस कर चुके हैं। वे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं, जो उनके अनुभव और विशेषज्ञता को दर्शाता है। वे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं, जो देश की सर्वोच्च कानूनी पदों में से एक है।
वर्तमान में कात्याल वॉशिंगटन डीसी स्थित एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म में वरिष्ठ भागीदार हैं और साथ ही जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर भी हैं। उन्होंने हार्वर्ड और येल जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थानों में भी अध्यापन किया है।
इस फैसले के बाद नील कात्याल की पहचान एक ऐसे वकील के रूप में और मजबूत (Neal Katyal Biography) हुई है, जिन्होंने दुनिया की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक संस्थाओं में से एक के फैसले को अदालत में चुनौती देकर उसे पलटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय मूल के इस वकील की सफलता को वैश्विक स्तर पर कानून और न्याय व्यवस्था में भारतीय समुदाय की बढ़ती भूमिका के रूप में भी देखा जा रहा है।






