सीजी भास्कर, 21 फरवरी। Bhilai Hospital Safety Probe : रिहायशी इलाके में संचालित निजी अस्पताल के बेसमेंट में ऑक्सीजन प्लांट और मेनिफोल्ड रूम को लेकर उठे सवालों के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है।
पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) की ओर से कलेक्टर और एसपी को भेजे गए निर्देश के बाद मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इस कदम को अस्पतालों में सुरक्षा मानकों के पालन की दिशा में अहम माना जा रहा है .
अनुमति से जुड़ी फाइलों में गड़बड़ी का दावा : Bhilai Hospital Safety Probe
स्थानीय रहवासियों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत अलग-अलग विभागों से अनुमति से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन किसी भी विभाग के पास ऑक्सीजन प्लांट की वैध स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज सामने नहीं आए। इसी आधार पर यह आशंका जताई गई कि रिहायशी क्षेत्र में स्थापित इस तरह की यूनिट नियमों के विपरीत हो सकती है.
पहले भी उठते रहे सवाल, कार्रवाई अब क्यों
यह अस्पताल स्थापना काल से ही विवादों में रहा है। समय-समय पर जिला और राज्य स्तर तक शिकायतें पहुंचीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जाता रहा।
हाल ही में देश के अन्य हिस्सों में ऑक्सीजन प्लांट से जुड़े हादसों का हवाला देते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की थी, जिसके बाद मामला दोबारा चर्चा में आया।
कलेक्टर ने बनाई संयुक्त जांच कमेटी
दुर्ग कलेक्टर ने PESO के निर्देशों के अनुपालन में एक संयुक्त जांच कमेटी गठित की है। कमेटी में एसडीएम छावनी, नगर पुलिस अधीक्षक भिलाई नगर, जिला सेनानी नगर सैनिक दुर्ग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी अथवा उनका नामांकित प्रतिनिधि शामिल हैं। कमेटी को गैस सिलेंडर नियम 2016 और एसएमपीवी (यू) नियम 2016 के तहत स्थिति की जांच कर स्पष्ट अभिमत के साथ रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
Bhilai Hospital Safety Probe : 24 घंटे में रिपोर्ट, आगे की कार्रवाई तय
प्रशासन ने कमेटी को 24 घंटे के भीतर संयुक्त जांच प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि मरीजों और आसपास के रहवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।







