रायपुर। चंदखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर परिसर के लिए प्रभु श्रीराम की नई 51 फीट ऊंची वनवासी प्रतिमा रायपुर पहुंच चुकी है। Ram Statue Kaushalya Dham को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच नई प्रतिमा का आना भक्तों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। प्रतिमा को फिलहाल रीजनल आर्ट एंड क्राफ्ट डिजाइन सेंटर में रखा गया है, जहां से विधि-विधान के साथ स्थापना की तैयारी की जाएगी।
ग्वालियर के मूर्तिकार की कारीगरी, स्वरूप में दिखेगा बदलाव
नई प्रतिमा का निर्माण ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने किया है। बताया जा रहा है कि प्रतिमा के हाव-भाव, वेश-भूषा और वनवासी स्वरूप को लेकर विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप (Divine Sculpture Design) में कोई कमी न रह जाए। कारीगरों की टीम ने महीनों की मेहनत के बाद इसे अंतिम रूप दिया है।
2021 की प्रतिमा पर उठे थे सवाल, बदलेगा परिसर का दृश्य
कौशल्या धाम में वर्ष 2021 में स्थापित 51 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर पहले ही विरोध के स्वर सुनाई दिए थे। विपक्ष की ओर से यह आपत्ति उठी थी कि प्रतिमा का स्वरूप प्रभु श्रीराम की पारंपरिक छवि से मेल नहीं खाता। इसी विवाद के बाद (Temple Aesthetics Issue) को लेकर नई प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिससे परिसर का दृश्य अब पूरी तरह बदलने वाला है।
‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ की याद और सियासी बहस
पूर्ववर्ती सरकार के दौरान राम वन पथ गमन और कौशल्या धाम जीर्णोद्धार को ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ के तौर पर पेश किया गया था। उस वक्त प्रतिमा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई थी। अब नई प्रतिमा के आगमन के साथ (Cultural Tourism CG) को फिर से रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सांसद का पत्र, स्थापना में देरी पर सवाल
विगत 20 नवंबर को भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई प्रतिमा की स्थापना में हो रही देरी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि सरकार गठन के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से आम लोगों में निराशा बढ़ रही है, और (Public Sentiment Temple) को देखते हुए जल्द निर्णय जरूरी है।
इसी माह होगी स्थापना, पर्यटन मंत्री का भरोसा
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने आश्वासन दिया है कि चंदखुरी स्थित कौशल्या धाम में इसी माह नई प्रतिमा की स्थापना पूरी कर ली जाएगी। रायपुर पहुंचने के बाद सभी धार्मिक परंपराओं के साथ स्थापना की जाएगी, जिससे परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और पर्यटन गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।






