सीजी भास्कर 22 फरवरी Naxal Surrender Telangana : तेलंगाना के जंगलों में सुरक्षाबलों के सामने शीर्ष माओवादी कमांडर तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम सीपीआई (माओवादी) नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि देवजी लंबे समय तक संगठन के रणनीतिक फैसलों से जुड़ा रहा। मौके पर कुल 16 माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई।
छत्तीसगढ़-तेलंगाना कॉरिडोर में सक्रिय नेटवर्क ढीला
सूत्र बताते हैं कि देवजी की गतिविधियां छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों तक फैली थीं। उसके साथ मल्ला राजी रेड्डी उर्फ मुरली/संग्राम जैसे नामों का आत्मसमर्पण, संगठन की फील्ड-लेवल कमांड पर सीधा असर डालता है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस घटनाक्रम से जंगल क्षेत्रों में दबाव बना हुआ नेटवर्क कमजोर पड़ेगा।
‘ये बहुत बड़ी जीत’, गृह मंत्री का आकलन
राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम को निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि बसवराजू के निष्क्रिय होने के बाद देवजी शीर्ष स्तर का नाम था। उनका कहना है कि यह संकेत है कि नक्सलवाद अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, और बचे हुए निष्क्रिय नेटवर्क को भी आत्मसमर्पण की ओर लाया जाएगा।
पुनर्वास की राह, बैंक खाते से खेती तक की व्यवस्था
सरकार की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास पैकेज, बैंकिंग सुविधाएं, वैकल्पिक आजीविका और सामाजिक पुनर्स्थापन की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, शादी-विवाह, खेती-किसानी और स्किल ट्रेनिंग जैसी व्यवस्थाओं के जरिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, ताकि लौटने के बाद दोबारा भटकाव न हो।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, नेटवर्क की वित्तीय जांच तेज
सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है कि आत्मसमर्पण के साथ-साथ नेटवर्क की फंडिंग, संपर्क-श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स की जांच तेज की जा रही है। डिजिटल ट्रेल और सीमावर्ती मूवमेंट पर निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि बचे हुए सेल्स की पहचान कर शांति प्रक्रिया को स्थायी बनाया जा सके।






