सीजी भास्कर, 22 फरवरी। अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद घोषित (US Supreme Court Tariff Decision) नई आयात शुल्क व्यवस्था का भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस फैसले के बाद भारत पर लागू रेसिप्रोकल टैरिफ में कमी आई है, जिससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलने और द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा मिलने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने घोषणा की है कि भारत सहित कई देशों पर लागू रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत कर दिया गया है। यह अस्थायी आयात शुल्क 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए लागू रहेगा। इससे पहले भारत पर कुल टैरिफ दर काफी अधिक थी, जिससे भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही थी। अब टैरिफ घटने से भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर बेचने का अवसर मिलेगा।
रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब यह है कि अमेरिका उन देशों पर उतनी ही दर से शुल्क लगाता है, जितना शुल्क वे देश अमेरिकी उत्पादों पर लगाते हैं। इसका उद्देश्य व्यापार में संतुलन बनाए (US Supreme Court Tariff Decision) रखना और अमेरिकी निर्यातकों को समान अवसर प्रदान करना है। हालांकि, टैरिफ में यह अस्थायी कमी भारत के लिए व्यापारिक दृष्टि से सकारात्मक मानी जा रही है।
व्यापार आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इस दौरान भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि आयात 45.3 अरब डॉलर का रहा। इस प्रकार भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में उल्लेखनीय अधिशेष प्राप्त हुआ।
भारतीय निर्यात में दवाएं, दूरसंचार उपकरण, रत्न और आभूषण, पेट्रोलियम उत्पाद तथा ऑटो पार्ट्स प्रमुख रहे हैं। वहीं, भारत अमेरिका से कच्चा तेल, कोयला, विमान उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी का आयात करता है। टैरिफ में कमी से इन क्षेत्रों में व्यापार और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी इस फैसले का प्रभाव (US Supreme Court Tariff Decision) पड़ सकता है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही अमेरिका में इस समझौते से जुड़े कानूनी पहलुओं को अंतिम रूप देने के लिए बैठक करेगा। माना जा रहा है कि समझौते पर अगले महीने हस्ताक्षर हो सकते हैं और इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ दरों में कमी से भारतीय निर्यातकों को अल्पकालिक लाभ मिल सकता है, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश व्यापार समझौते को किस रूप में लागू करते हैं। यह फैसला भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






