सीजी भास्कर 26 फ़रवरी Chhattisgarh Paddy Procurement Protest : रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धान खरीदी को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। शून्यकाल में विपक्ष ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन सभापति द्वारा प्रस्ताव अग्राह्य घोषित किए जाने के बाद सदन का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में (Farmer Protest Issue) को फिर से केंद्र में ला दिया।
गर्भगृह तक पहुँची नारेबाजी
स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार होने से नाराज़ कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सीधे गर्भगृह तक पहुँच गए। सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए अव्यवस्थित हो गई। नियमों के तहत गर्भगृह में प्रवेश करने वाले सदस्यों को स्वमेव निलंबित माना गया। यह दृश्य विधानसभा के भीतर (Assembly Disruption News) के तौर पर चर्चा का विषय बन गया।
विपक्ष का आरोप, नीति से किसान परेशान
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सरकार की धान खरीदी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यवस्था के चलते किसानों को बार-बार अपमान और परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि टोकन प्रणाली और रकबा समर्पण जैसी प्रक्रियाओं ने जमीनी स्तर पर किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विपक्ष का दावा है कि कई जिलों में किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा गया, जिससे ग्रामीण इलाकों में असंतोष गहराया।
जिलों से उठे दर्द के सुर
विधायकों ने जांजगीर-चांपा, बालोद, धमतरी, बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों का हवाला देते हुए बताया कि खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं के कारण किसान परेशान हुए। कुछ मामलों में प्रशासनिक सख्ती के आरोप भी लगाए गए। विपक्ष का कहना है कि इन परिस्थितियों ने (Paddy Procurement Crisis) को और गंभीर बना दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री का सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि धान और किसान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से सरकार बच रही है। उन्होंने प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि किसानों के घरों तक जाकर दबाव बनाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। उनके मुताबिक, यदि सदन में चर्चा नहीं होती तो कम से कम सरकार को आधिकारिक बयान देकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सभापति का रुख और सदन की कार्यवाही
सभापति ने स्पष्ट किया कि बजट सत्र के दौरान आय-व्यय पर चर्चा प्राथमिकता होती है, इसलिए स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे से कार्यवाही बाधित हुई और सदन में राजनीतिक गर्मी और तेज हो गई। यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में (Political Tension CG) को और बढ़ा सकता है।
आगे क्या बदलेगा?
धान खरीदी का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद नहीं बढ़ा तो आने वाले समय में यह विषय सड़कों से लेकर सदन तक और बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। किसान संगठनों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी है।






