सीजी भास्कर, 5 मार्च। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आत्महत्या से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट (Chhattisgarh High Court Judgment) किया है कि केवल प्रेम संबंध टूट जाना या शादी से इनकार कर देना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि जब तक आरोपी की ओर से आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष और सक्रिय उकसावे के ठोस प्रमाण न हों, तब तक उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
High Court of Chhattisgarh ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए सत्र न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त किया गया था। यह मामला बिलासपुर जिले के चकरभाठा थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
मामले के अनुसार सुनील कुमार साहू और एक 21 वर्षीय युवती के बीच पहले दोस्ती और बाद में प्रेम संबंध थे। वर्ष 2016 में दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन युवक के माता-पिता इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। इसी बीच युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना के बाद आरोप लगाया गया कि आत्महत्या से कुछ समय पहले दोनों के बीच विवाद हुआ था और युवक ने शादी से इनकार (Chhattisgarh High Court Judgment) कर दिया था। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद युवक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान युवती के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला, लेकिन उसमें आरोपी के खिलाफ कोई आरोप नहीं था। अदालत में सुनवाई के दौरान मृतका के परिवार के सदस्यों को गवाह के रूप में पेश किया गया, जिन्होंने प्रेम संबंध की बात तो स्वीकार की, लेकिन शादी से इनकार की बात सीधे तौर पर आरोपी से सुने जाने की पुष्टि नहीं कर सके।
23 जनवरी 2017 को चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी ने मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाया या मानसिक रूप से ऐसा करने के लिए प्रेरित किया था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि सुसाइड नोट में आरोपी के खिलाफ कोई आरोप दर्ज नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला (Chhattisgarh High Court Judgment) देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 306 के तहत दोष सिद्ध करने के लिए आरोपी की स्पष्ट और प्रत्यक्ष भूमिका का प्रमाण होना आवश्यक है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केवल प्रेम संबंध टूटना या विवाह से इनकार करना दुष्प्रेरण नहीं माना जा सकता, जब तक कि आत्महत्या के लिए उकसाने की सीधी और सक्रिय भूमिका के पुख्ता साक्ष्य मौजूद न हों।





