सीजी भास्कर 11 मार्च छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Chhattisgarh High Court ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पूर्व आबकारी आयुक्त Niranjan Das की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आर्थिक अपराधों के मामलों में आरोप गंभीर होते हैं और इसमें आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है। इसी वजह से अदालत ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। यह मामला प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में रहा Chhattisgarh Liquor Scam Case से जुड़ा है।
जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने सुनाया फैसला
इस मामले की सुनवाई जस्टिस Arvind Kumar Verma की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपी पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप हैं। अदालत के अनुसार ऐसे मामलों में जांच और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत देना उचित नहीं माना गया। इस तरह अदालत के High Court Bail Decision ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
ईडी की कार्रवाई और गिरफ्तारी का मामला भी उठा
सुनवाई के दौरान निरंजन दास की ओर से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि उन्हें Enforcement Directorate ने 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। वकीलों ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी उस समय हुई जब वह पहले से ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में थे। साथ ही यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी से पहले संबंधित अदालत से अनुमति नहीं ली गई थी। हालांकि ईडी की जांच से जुड़े इस ED Money Laundering Probe में अदालत ने इन दलीलों को जमानत के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
दीपेन चावड़ा को मिली राहत, अदालत ने दी जमानत
इस मामले में एक अन्य आरोपी Deepen Chawda को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। अदालत ने उनकी जमानत मंजूर करते हुए कुछ शर्तों के साथ रिहाई की अनुमति दी है। वहीं सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि शराब नीति और वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच जारी है। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर Liquor Scam Bail Update पर प्रदेश की नजर बनी हुई है।





