सीजी भास्कर, 11 मार्च। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संसद में जोरदार बहस (Lok Sabha Heated Debate) देखने को मिली। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और भाजपा के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
बहस तब गरमा गई जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें कई बार सदन में बोलने से रोका गया और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कॉम्प्रोमाइज्ड” होने का मुद्दा उठाया था।
राहुल गांधी का आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री से जुड़े कुछ मुद्दे उठाने की कोशिश की थी, जिनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब और एपस्टीन मामले का जिक्र शामिल था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों को उठाने पर उन्हें बोलने से रोक दिया गया।
रविशंकर प्रसाद का जवाब
राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में इस तरह के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
उन्होंने कहा,
“मैं नेता प्रतिपक्ष को याद दिलाना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी भी कॉम्प्रोमाइज्ड नहीं हो सकते।” साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पॉइंट ऑफ ऑर्डर के दौरान इस तरह की बहस की अनुमति नहीं होती।
अविश्वास प्रस्ताव पर भी उठाए सवाल
रविशंकर प्रसाद ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है वह अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है, इसलिए उसकी प्रमाणिकता पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि संसद की कार्यवाही का इस्तेमाल किसी नेता के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए (Lok Sabha Heated Debate) न किया जाए।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंशों का हवाला देने की कोशिश की थी। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई थी और कहा था कि अप्रकाशित किताब का हवाला देना उचित नहीं है क्योंकि उसकी प्रामाणिकता साबित नहीं है।
इसके बाद कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला। इस प्रस्ताव पर सदन में करीब 10 घंटे की चर्चा तय की गई है और कुल 118 विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।





