सीजी भास्कर, 15 मार्च। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा, जागरूकता और भरोसेमंद बाजार व्यवस्था को लेकर गंभीर (World Consumer Rights Day) चर्चा हुई। इस मौके पर रजिस्ट्रार श्रीनिवास तिवारी ने कहा कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा केवल कानूनी व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील समाज की पहचान भी है। उन्होंने इस वर्ष की थीम “सुरक्षित उत्पाद, आत्मविश्वासी उपभोक्ता” को उपभोक्ता संरक्षण की मूल भावना से जुड़ा बताते हुए कहा कि जब तक नागरिकों को सुरक्षित वस्तुएं और भरोसेमंद सेवाएं नहीं मिलेंगी, तब तक बाजार व्यवस्था में वास्तविक विश्वास कायम नहीं हो सकता।
कार्यक्रम के दौरान श्रीनिवास तिवारी ने कहा कि आज का समय तेजी से बदलते बाजार का है, जहां पारंपरिक खरीदारी के साथ-साथ डिजिटल और वैश्विक बाजार का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे दौर में उपभोक्ता की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि उत्पाद और सेवाएं बहुत तेजी से लोगों तक पहुंच रही हैं, लेकिन इसके साथ यह जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि उपभोक्ता के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक हितों से किसी तरह का समझौता न हो। उपभोक्ता का भरोसा तभी मजबूत होता है, जब उसे यह विश्वास हो कि उसके साथ निष्पक्ष व्यवहार होगा और उसे मिलने वाला उत्पाद तय मानकों पर खरा उतरेगा।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना सभी संबंधित संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है। चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित (World Consumer Rights Day) किया गया कि मानकों और नियमों का कड़ाई से पालन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहारिक स्तर पर पूरी ईमानदारी से लागू किया जाना जरूरी है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की भावना तभी सार्थक मानी जाएगी, जब आम नागरिक को उसका सीधा लाभ महसूस हो और शिकायत की स्थिति में उसे प्रभावी राहत भी मिल सके।
रजिस्ट्रार ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा सरकार, संस्थानों और समाज की साझा जिम्मेदारी होती है। उन्होंने संकेत दिया कि जागरूक उपभोक्ता ही मजबूत बाजार व्यवस्था की नींव होता है। जब नागरिक अपने अधिकारों को समझते हैं और संस्थाएं अपनी जवाबदेही को गंभीरता से निभाती हैं, तब एक सुरक्षित और पारदर्शी उपभोक्ता वातावरण तैयार होता है। यही स्थिति बाजार में भरोसा बढ़ाती है और दीर्घकाल में आर्थिक व्यवस्था को भी स्थिरता देती है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। इस सामूहिक संकल्प का उद्देश्य यही रहा कि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित उत्पाद मिलें, वह आत्मविश्वास के साथ अपने अधिकारों का उपयोग कर सके और जरूरत पड़ने पर संरक्षण की व्यवस्था उस तक प्रभावी रूप में पहुंचे। यह भी माना गया कि उपभोक्ता कल्याण केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह व्यापक सामाजिक विश्वास और राष्ट्रीय प्रगति से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल औपचारिक संदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह स्पष्ट किया कि बदलते बाजार के दौर में उपभोक्ता केंद्रित सोच को और मजबूत करने की जरूरत है। सुरक्षित उत्पाद, पारदर्शी सेवाएं, जवाबदेह संस्थाएं और जागरूक नागरिक ये चारों मिलकर ही एक ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं, जिसमें उपभोक्ता खुद को संरक्षित और सम्मानित महसूस करे। यही किसी भी स्वस्थ अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार शासन व्यवस्था की सबसे मजबूत पहचान मानी जाती है।





