सीजी भास्कर, 15 मार्च। ओडिशा में माओवादी नेटवर्क को एक और बड़ा झटका लगा है। कालाहांडी जिले के भवानीपटना में 11 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 63.25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें एक डिविजनल कमेटी सदस्य, पांच एरिया कमेटी सदस्य और पांच पार्टी कैडर शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान ये नक्सली अपने साथ 11 हथियार भी लेकर पहुंचे, जिनमें एके-47, इंसास राइफल, एसएलआर, सिंगल-शॉट हथियार और 12 बोर गन शामिल बताई गई हैं।
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में नकुल नाम का एक डिविजनल कमेटी सदस्य भी शामिल है, जिस पर अकेले 22 लाख रुपये का इनाम घोषित था। बताया गया है कि ये सभी रायगढ़ा-घुमसार एरिया कमेटी से जुड़े थे और लंबे समय से वाम उग्रवाद से संबंधित गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। भवानीपटना में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया, जिसे सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती इलाकों में नक्सली प्रभाव कमजोर पड़ने का संकेत मान रही हैं।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सिर्फ संख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार दबिश, जंगल क्षेत्रों में बढ़ी कार्रवाई और पुनर्वास नीति की सक्रियता ने माओवादी कैडरों पर दबाव बढ़ाया है। ओडिशा पुलिस ने भी संकेत दिया है कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी, ताकि उन्हें मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल सके। इससे यह संदेश भी गया है कि सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ पुनर्वास का रास्ता भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों में नक्सल संगठन को लगातार झटके लगे हैं। 11 मार्च 2026 को बस्तर में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 108 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया था। इस सामूहिक सरेंडर को हाल के वर्षों की बड़ी घटनाओं में गिना गया, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में इनामी राशि को लेकर 3.29 करोड़ रुपये से 3.95 करोड़ रुपये तक के आंकड़े सामने आए।
ओडिशा में इससे पहले 11 मार्च 2026 को ही 10 माओवादी कैडरों ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन पर घोषित इनामी राशि को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए, लेकिन यह साफ है कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार समर्पण और पुनर्वास मॉडल के जरिए माओवादी ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। ताजा 11 नक्सलियों का भवानीपटना में हुआ आत्मसमर्पण उसी कड़ी का नया और महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का बड़ा असर ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों पर पड़ सकता है। जब संगठन के सक्रिय और इनामी सदस्य हथियारों के साथ सरेंडर करते हैं, तो इसका असर केवल स्थानीय नेटवर्क पर नहीं, बल्कि भर्ती, रसद और क्षेत्रीय प्रभाव पर भी पड़ता है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इसे सिर्फ एक पुलिस उपलब्धि नहीं, बल्कि माओवादी ढांचे के मनोबल पर चोट के रूप में भी देख रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस सरेंडर के बाद और कैडर भी मुख्यधारा में लौटने का रास्ता अपनाते हैं।





