सीजी भास्कर, 16 मार्च। छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में एक अहम मामला तूल पकड़ता (Women Fraud Case Chhattisgarh) दिख रहा है। भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामला फ्लोरामैक्स कंपनी के नाम का कथित इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में महिलाओं से ठगी के आरोपों से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसे लेकर आयोग ने पहले भी राज्य सरकार से जवाब और कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
फ्लोरामैक्स मामले को लेकर बढ़ी सख्ती
जानकारी के मुताबिक, पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने शिकायत में आरोप लगाया था कि फ्लोरामैक्स कंपनी के नाम का उपयोग कर 40 हजार से अधिक महिलाओं से अरबों रुपये की ठगी की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि यह मामला राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को प्रभावित करता है, इसलिए इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। कंवर ने आरोप लगाया कि कोरबा के तत्कालीन कलेक्टर अजीत बसंत की ओर से शासन और आयोग को गलत जानकारी दी गई, जिससे पूरे मामले की प्रकृति और भी गंभीर हो गई।
इसी शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने राज्य सरकार से जवाब तलब (Women Fraud Case Chhattisgarh) किया था। आयोग ने 16 अक्टूबर 2025 को हुई कार्यवाही में मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि फ्लोरामैक्स मामले में पीड़ितों की शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई की जाए और आयोग को इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। दी गई समयसीमा बीतने के बाद भी कथित तौर पर अपेक्षित सूचना नहीं भेजे जाने पर आयोग ने इस मामले में आगे सख्ती दिखाई है।
17 मार्च को व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश
मामले में आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को 17 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह निर्देश इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आयोग अब केवल लिखित जवाब से संतुष्ट नहीं है और मामले की प्रगति, प्रशासनिक जवाबदेही तथा अब तक हुई कार्रवाई पर सीधे स्पष्टीकरण चाहता है।
इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर तब, जब मामला बड़ी संख्या में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े वित्तीय नुकसान से संबंधित बताया जा रहा है। आयोग का यह कदम संकेत देता है कि शिकायतों की अनदेखी या कार्रवाई में देरी को लेकर केंद्रीय स्तर पर भी गंभीरता बढ़ी है।
ननकीराम कंवर ने CBI जांच की मांग उठाई
पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने इस मामले में साफ कहा है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हजारों महिलाओं से कथित ठगी केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक ऐसी कार्रवाई है जो केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को कमजोर करने वाली मंशा भी दर्शाती है। उन्होंने मांग की है कि कोरबा जिले के संबंधित दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कंवर ने यह भी मांग उठाई है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से कराई जाए, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो सके। उनके इस बयान के बाद मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
अब सबकी नजर सरकार के जवाब पर
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात यह होगी कि राज्य सरकार आयोग के समक्ष क्या जवाब (Women Fraud Case Chhattisgarh) रखती है और अब तक की कार्रवाई का क्या ब्यौरा प्रस्तुत करती है। मुख्य सचिव की संभावित पेशी के बाद यह साफ हो सकेगा कि आयोग राज्य प्रशासन से किस स्तर की जवाबदेही चाहता है और आगे क्या दिशा तय होती है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संवैधानिक अधिकारों के तहत वह शिकायतों की जांच और संबंधित अधिकारियों को तलब कर सकता है। आयोग की संवैधानिक भूमिका और राज्यों के साथ उसकी समीक्षा बैठकों का दायरा आधिकारिक तौर पर दर्ज है।





