सीजी भास्कर, 18 मार्च। वैश्विक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सप्लाई को राहत देने वाली खबर (Mundra Port Crude Oil Shipment) सामने आई है। भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित तरीके से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है। इस जहाज पर 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ था, जो यूएई के फुजैराह बंदरगाह से होर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए भारत पहुंचा। ऐसे समय में जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है, यह डिलीवरी भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
जंग के बीच भी नहीं रुकी सप्लाई चेन
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बावजूद तेल और गैस की आपूर्ति जारी रहना भारत के लिए बड़ी राहत है। देश में रोजाना करीब 5.5 से 5.6 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है, ऐसे में हर शिपमेंट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ‘जग लाडकी’ का सुरक्षित पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर लगातार सक्रिय बना हुआ है।
लगातार पहुंच रहे जहाज, LPG सप्लाई भी मजबूत
इससे पहले भी दो बड़े जहाज भारत पहुंच चुके हैं। ‘नंदा देवी’ जहाज वडिनार पोर्ट पर करीब 46,500 मीट्रिक टन LPG लेकर पहुंचा, जबकि ‘शिवालिक’ नाम का जहाज मुंद्रा पोर्ट पर 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर (Mundra Port Crude Oil Shipment) आया। यह मात्रा करीब 32 लाख से ज्यादा घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर बताई जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे संवेदनशील रास्ता
तेल टैंकर का यह सफर होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जो इस समय दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जा रहा है। यही वह रास्ता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक बाजार और भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ सकता है।
ईरान-इजराइल तनाव से बढ़ी चिंता
इस बीच मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान और इजराइल के बीच हमलों का सिलसिला तेज हो गया है, वहीं अमेरिका भी इस क्षेत्र में सक्रिय (Mundra Port Crude Oil Shipment) नजर आ रहा है। इन घटनाओं ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों अहम है हर शिपमेंट
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए हर तेल और गैस का जहाज देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी से सीधे जुड़ा होता है। ऐसे माहौल में ‘जग लाडकी’ जैसे जहाजों का सुरक्षित पहुंचना न सिर्फ राहत देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि संकट के बीच भी सप्लाई चेन को बनाए रखने की कोशिश जारी है।





