CG Bhaskar, 28 मार्च। शहर में एक नया (Cyber Fraud Alert) तेजी से फैल रहा है, जिसमें ठग खुद को बड़े पुलिस अधिकारियों का करीबी बताकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी फेसबुक आईडी बनाई जा रही है, जिसके जरिए लोगों को मैसेज भेजे जा रहे हैं। देखने में यह मैसेज मदद या जानकारी जैसा लगता है, लेकिन असल में यह एक सुनियोजित ठगी का जाल है।
कैसे काम करता है ‘Online Scam India’ का यह नया मॉडल
इस पूरे मामले में ठग पहले भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। वे पुलिस अधिकारी की फोटो लगाकर बताते हैं कि उनका एक जानने वाला CRPF अधिकारी ट्रांसफर के कारण अपना घरेलू सामान सस्ते में बेच रहा है।
इसके बाद व्हाट्सएप पर संपर्क करवाया जाता है, जहां ‘संतोष कुमार’ नाम से व्यक्ति खुद को CRPF जवान बताता है और महंगे सामान—LED TV, AC, फ्रिज, वॉशिंग मशीन—की तस्वीरें भेजता है।
यह पूरा तरीका एक क्लासिक (Online Scam India) का उदाहरण बन चुका है।

लुभावने ऑफर के पीछे छुपा ‘Fake Facebook ID’ का जाल
ठगों का सबसे मजबूत हथियार है उनका ऑफर। लाखों का सामान सिर्फ ₹90 हजार से ₹1 लाख में देने की बात कही जाती है। साथ ही यह भी दावा किया जाता है कि सामान CRPF ट्रक से घर तक फ्री डिलीवरी में आएगा।
भरोसा बढ़ाने के लिए फर्जी बिल, ट्रक लोडिंग की तस्वीरें और वर्दी में फोटो भी भेजे जाते हैं। यह पूरा सेटअप एक प्रोफेशनल (Fake Facebook ID) स्कैम की तरह तैयार किया जाता है, जिससे आम आदमी आसानी से फंस जाता है।
‘Impersonation Scam’ में असली खेल : Cyber Fraud Alert
जैसे ही ग्राहक डील के लिए तैयार होता है, ठग असली चाल चलते हैं। “गेट पास”, “कंसाइनमेंट फीस” या “आर्मी टैक्स” के नाम पर ₹40,000 से ज्यादा की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा जाता है।
पैसे मिलते ही नंबर बंद, प्रोफाइल गायब—और पीड़ित को समझ आता है कि वह एक बड़े (Impersonation Scam) का शिकार हो चुका है।

जब अफसर का नाम बन जाता है भरोसे का जाल : Cyber Fraud Alert
इस ठगी की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसमें पुलिस अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल होता है। जब कोई व्यक्ति शक करता है, तो फर्जी आईडी से ही जवाब आता है—“वह मेरा भरोसेमंद आदमी है।”
यही वह पल होता है जब लोग बिना ज्यादा सोचे पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

इन संकेतों से पहचानें ठगी का खेल
ऐसे मामलों में कुछ सामान्य संकेत होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—
मैसेज में गलत अंग्रेजी या टाइपिंग मिस्टेक,
बहुत सस्ता सामान,
डिलीवरी से पहले पेमेंट की मांग,
और वर्दी में फोटो दिखाकर भरोसा दिलाना।
याद रखें, कोई भी असली पुलिस या सेना अधिकारी इस तरह सोशल मीडिया पर सामान नहीं बेचता।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें, जागरूक बनें
दुर्ग एएसपी सुखनंदन राठौर ने बताया कि इस तरह के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस लगातार लोगों को जागरूक कर रही है कि सोशल मीडिया पर आने वाले ऐसे ऑफर से दूर रहें। अगर कोई परिचित व्यक्ति भी ऑनलाइन पैसे मांगता है, तो पहले सीधे फोन या आमने-सामने पुष्टि जरूर करें।
संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।



