सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex खुलते ही करीब 1200 अंक तक लुढ़क गया, वहीं Nifty 50 में भी जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती मिनटों में ही बाजार में (Stock Market Crash) जैसा माहौल बन गया, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया।
कुछ ही मिनटों में 7 लाख करोड़ का नुकसान
बाजार की इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 422 लाख करोड़ रुपए से घटकर 415 लाख करोड़ रुपए के आसपास पहुंच गया। यानी निवेशकों के करीब 7 लाख करोड़ रुपए कुछ ही समय में डूब गए, जो (Market Cap Loss) का बड़ा उदाहरण है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी अनिश्चितता
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। United States और Iran के बीच जारी तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। इस वजह से (Global Market Pressure) बना हुआ है, जिसका असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
मार्च महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला है। लगातार हो रही इस बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इसे (FPI Outflow India) के रूप में देखा जा रहा है, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
F&O एक्सपायरी से बढ़ी अस्थिरता
फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की मासिक एक्सपायरी भी बाजार में उतार-चढ़ाव का कारण बनी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक्सपायरी के आसपास बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है, और सोमवार को भी यही ट्रेंड देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भी चिंता का विषय बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ सकता है। यह स्थिति (Crude Oil Impact) के रूप में बाजार को प्रभावित कर रही है।
आगे भी रह सकती है उठापटक
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल के चलते आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।


