Middle East War Statement : जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख Mehbooba Mufti सोमवार को विधानसभा पहुंचीं, जहां उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव पर बड़ा बयान दिया। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान हर मोर्चे पर अमेरिका और इजराइल पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि ईरान इस जंग को जीतेगा, “इंशाअल्लाह”। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब (Middle East War) को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है।
‘जमीन पर एक्शन की बात, लेकिन पीछे हट रहा अमेरिका’
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमेरिका भले ही जमीनी कार्रवाई की बात कर रहा हो, लेकिन असल में उसकी स्थिति कमजोर होती दिख रही है। उनके मुताबिक, ईरान की ताकत ने अमेरिका और इजराइल को असहज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की सेनाएं मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जबकि दूसरी ओर अमेरिका और इजराइल की सेनाएं खुलकर सामने आने से बच रही हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को (US Military Action) के संदर्भ में अहम बताया।
‘ईरान के लिए जंग शहादत, इसलिए नहीं डरती उसकी सेना’
अपने बयान में उन्होंने कहा कि ईरान के लिए यह सिर्फ एक युद्ध नहीं, बल्कि शहादत का सवाल है। वहां के सैनिक इस भावना के साथ लड़ रहे हैं कि जंग में मरना भी एक सम्मान है। यही वजह है कि ईरान की सेना बिना किसी डर के मोर्चे पर डटी हुई है। उन्होंने इसे (Iran Power) का सबसे बड़ा कारण बताया।
पहले भी जता चुकी हैं विरोध, ट्रंप-नेतन्याहू के पोस्टर जलाए थे
इससे पहले भी महबूबा मुफ्ती मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर खुलकर अपनी राय रख चुकी हैं। उन्होंने 4 मार्च को Donald Trump और Benjamin Netanyahu के पोस्टर जलाकर विरोध दर्ज कराया था। उनका कहना था कि इस जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, खासकर पेट्रोल की कीमतों और रोजगार पर।
‘जंग का असर भारत पर भी पड़ेगा’, अर्थव्यवस्था और रोजगार पर चिंता
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो गल्फ देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों को वापस लौटना पड़ सकता है, जिससे देश में बेरोजगारी बढ़ेगी। साथ ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई भी बढ़ेगी। उन्होंने इस स्थिति को (Global Impact) बताते हुए जल्द से जल्द युद्ध खत्म करने की अपील की।
8 साल बाद विधानसभा पहुंचीं, सियासी हलचल तेज
गौरतलब है कि साल 2018 के बाद यह पहला मौका है जब महबूबा मुफ्ती बजट सत्र के दौरान विधानसभा पहुंचीं हैं। 30 मार्च 2026 को उनका यह कदम राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है। उनके इस दौरे से यह संकेत मिल रहे हैं कि वह एक बार फिर सक्रिय राजनीति में वापसी कर सकती हैं। इस घटनाक्रम के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।


