(Naxal Politics Clash) को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय किसे मिले, इसी सवाल पर सत्ताधारी और विपक्ष आमने-सामने हैं। संसद में दिए गए बयान के बाद यह विवाद अब सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुका है।
भूपेश बघेल का हमला, Political Debate Challenge से बढ़ा विवाद
(Political Debate Challenge) के तहत पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah को खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि राज्य में कांग्रेस सरकार के दौरान केंद्र को नक्सलवाद के खिलाफ हर संभव सहयोग दिया गया, जबकि संसद में इसके उलट बयान दिया गया।
इसके बाद बघेल ने एक अखबार की कतरन साझा करते हुए सवाल किया— “और सबूत चाहिए क्या?”
रमन सिंह का जवाब, Raman Singh Response में तीखा तंज
(Raman Singh Response) में विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Raman Singh ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े दावों के बीच जब ठोस सबूत की बात आती है, तो केवल अखबार की कतरन ही सामने रखी जाती है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा— “दूसरों पर आरोप लगाकर अपने दाग नहीं छुपाए जा सकते, एक बार आईने में भी देख लेना चाहिए।”
झीरम घाटी का जिक्र, Jhiram Valley Attack फिर चर्चा में
(Jhiram Valley Attack) का मुद्दा भी इस सियासी बहस में फिर से उभर आया है। रमन सिंह ने अपने बयान में झीरम घाटी नक्सल हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय के गंभीर मामलों में भी ठोस जवाब नहीं दिए गए। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
सोशल मीडिया बना अखाड़ा, Political War Online तेज
(Political War Online) के इस दौर में नेताओं के बीच सोशल मीडिया ही मुख्य रणभूमि बन गया है। एक के बाद एक पोस्ट, वीडियो और बयान सामने आ रहे हैं, जिनमें आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। आम जनता भी इस बहस को करीब से देख रही है, और अलग-अलग राय सामने आ रही है।
आने वाले समय में और बढ़ सकती है गर्मी
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह विवाद अभी थमने वाला नहीं है। नक्सलवाद जैसा संवेदनशील मुद्दा जब सियासत के केंद्र में आता है, तो बयानबाजी और तीखी हो जाती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले सकता है।


