बीजापुर/अबूझमाड़: Indravati Bridge Project Bijapur : छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की बढ़ती धमक और घटते नक्सल प्रभाव का असर अब बुनियादी ढांचे के विकास पर दिखने लगा है। लंबे समय से अधर में लटकी इंद्रावती नदी पुल परियोजना को फिर से रफ्तार देने के लिए ब्रिज कॉर्पोरेशन ने ₹28 करोड़ का नया टेंडर जारी कर दिया है। यह पुल न केवल दो राज्यों को जोड़ेगा, बल्कि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित होगा।
नक्सली खौफ से रुका था काम, अब बदली तस्वीर
यह प्रोजेक्ट कोई नया नहीं है, बल्कि नक्सलियों के विरोध की भेंट चढ़ चुका था।
- पिछला अवरोध: पूर्व में जब काम शुरू हुआ था, तब नक्सलियों ने ठेकेदार के कर्मचारियों का अपहरण कर लिया था और काम बंद करने की खूनी धमकी दी थी। इसके बाद दहशत के कारण कोई भी ठेकेदार इस ‘डेथ जोन’ में काम करने को तैयार नहीं था।
- बदला माहौल: क्षेत्र में सुरक्षा बलों की पैठ बढ़ने और इंद्रावती के किनारों पर स्थायी सुरक्षा कैंप स्थापित होने से अब हालात बदल चुके हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार निर्माण कार्य पूरी तरह सुरक्षा घेरे में संपन्न होगा।
लागत में आई कमी: 42 करोड़ से घटकर 28 करोड़
दिलचस्प बात यह है कि इस बार टेंडर की राशि कम हो गई है।
- कारण: पूर्व में इसकी कुल लागत ₹42 करोड़ आंकी गई थी। काम बंद होने से पहले 8 पिलर का निर्माण पूरा कर लिया गया था। अब नए टेंडर में केवल शेष कार्य को ही शामिल किया गया है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा।
बीजापुर से मुंबई तक का सफर होगा सुगम
यह पुल सामरिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- महाराष्ट्र से सीधा संपर्क: पुल बनने के बाद बीजापुर सीधे महाराष्ट्र के भंवरागढ़ से जुड़ जाएगा।
- दूरी में कमी: इससे बीजापुर से नागपुर और आगे मुंबई तक की दूरी काफी कम हो जाएगी। यह अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी व्यापार और परिवहन के नए रास्ते खोलेगी।
- क्षेत्रीय विकास: अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और पीडीएस (PDS) राशन की पहुंच सुलभ हो जाएगी।
इंद्रावती पर अब तक का सबसे लंबा पुल
यह इंजीनियरिंग का भी एक बड़ा नमूना होगा।
- लंबाई: 930 मीटर लंबा यह पुल इंद्रावती नदी पर बनने वाला अब तक का सबसे लंबा पुल होगा।
- तकनीकी चुनौती: नदी के बहाव और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसे आधुनिक तकनीकों से तैयार किया जाएगा ताकि यह दशकों तक बस्तर की प्रगति का गवाह बना रहे।
परियोजना के मुख्य लाभ:
- सुरक्षा: सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होगी, जिससे नक्सल उन्मूलन अभियान को गति मिलेगी।
- रोजगार: सड़क और परिवहन विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर खुलेंगे।
- डिजिटल कनेक्टिविटी: पुल के साथ-साथ मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के काम में भी तेजी आएगी।
प्रशासन को उम्मीद है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही बारिश से पहले शुरुआती काम को गति दे दी जाएगी, ताकि बस्तर के इस ‘सपनों के पुल’ को जल्द हकीकत में बदला जा सके।


