सीजी भास्कर,10। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान) योजना के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 33 अस्पतालों को निलंबित (33 Hospitals Suspended Raipur) कर दिया है। इसके साथ ही 26 अन्य अस्पतालों के भुगतान और प्री-ऑथराइजेशन (Pre-auth) पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह सख्त कदम राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन और नए पोर्टल HEM 2.0 पर अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया पूरी न करने के कारण उठाया गया है। राज्य नोडल एजेंसी ने साफ कर दिया है कि मरीजों के इलाज और सरकारी धन के उपयोग में किसी भी तरह की लापरवाही या अपारदर्शिता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नियमों की अनदेखी और दस्तावेज पूरे न होना बनी वजह (33 Hospitals Suspended Raipur)
जांच में सामने आया कि 21 अस्पतालों ने नए पोर्टल पर आवेदन करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जबकि 12 अस्पतालों ने पोर्टल पर जानकारी अपडेट करने के बाद विभागीय सवालों (Queries) का जवाब नहीं दिया। इसके अलावा, 26 अस्पतालों के दस्तावेजों में भारी विसंगतियां (33 Hospitals Suspended Raipur) पाई गईं, जिसके चलते उनका भुगतान रोक दिया गया है। विभाग के मुताबिक, आयुष्मान योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से जनता तक पहुँचाने के लिए अस्पतालों को तकनीकी रूप से अपडेट होना अनिवार्य है, लेकिन कई संस्थानों ने बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं की।
रायपुर और दुर्ग के अस्पतालों पर गिरी सबसे ज्यादा गाज (33 Hospitals Suspended Raipur)
निलंबन की इस कार्रवाई की चपेट में राजधानी रायपुर और दुर्ग संभाग के सबसे ज्यादा अस्पताल आए हैं। रायपुर के जौहरी हॉस्पिटल, महादेव हॉस्पिटल, जैन हॉस्पिटल और कालड़ा नर्सिंग होम जैसे प्रमुख नाम इस सूची में शामिल हैं। वहीं दुर्ग-भिलाई के ए.पी. सर्जिकल सेंटर, आई.एम.आई. हॉस्पिटल और साईं कृपा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल को भी सस्पेंड किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि जो अस्पताल नियमों का पालन करने में कोताही बरतेंगे, उनकी मान्यता स्थायी रूप से रद्द करने पर भी विचार किया जा सकता है।
मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए आगे भी रहेगी सख्ती (33 Hospitals Suspended Raipur)
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि योजना की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। सभी पंजीकृत अस्पतालों को कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे समयबद्ध तरीके से HEM 2.0 पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करें ताकि मरीजों को कैशलेस इलाज में कोई बाधा न आए। आने वाले दिनों में अन्य जिलों के अस्पतालों की भी समीक्षा की जाएगी और मानकों पर खरे न उतरने वाले संस्थानों के खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई जारी रहेगी।


