छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में आयोजित Abujhmad Peace Half Marathon सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की तस्वीर बनकर सामने आया। नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर से शुरू हुई 21 किलोमीटर की इस दौड़ में देश-विदेश से आए दस हजार से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया, जिसने इस दुर्गम क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दी।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने बढ़ाया आयोजन का महत्व
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरी झंडी दिखाकर धावकों को रवाना किया और विजेता प्रतिभागियों के लिए पदकों का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ से उठती यह दौड़ पूरे देश को शांति और सद्भाव का संदेश दे रही है। उनके शब्दों में, यह वही इलाका है जहाँ कभी आम लोगों की पहुंच भी मुश्किल मानी जाती थी।
अबूझमाड़: डर से उम्मीद तक का सफर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अबूझमाड़ का नाम कभी असुरक्षा और भय से जोड़ा जाता था, लेकिन अब माहौल बदल चुका है। युवाओं की भागीदारी यह दिखाती है कि बस्तर क्षेत्र अब विकास और विश्वास की राह पर आगे बढ़ रहा है। यही बदलाव इस आयोजन की असली जीत है।
पूर्व नक्सलियों की भागीदारी बनी संदेश का केंद्र
इस मैराथन की सबसे खास तस्वीर तब सामने आई, जब आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली युवाओं ने हथियार छोड़कर दौड़ में कदम मिलाया। यह दृश्य अपने-आप में Bastar Peace Run का सबसे मजबूत संदेश बन गया—हिंसा नहीं, मुख्यधारा में लौटने का रास्ता ही भविष्य है।
स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका
अबूझमाड़िया जनजाति और स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी ने आयोजन को जमीन से जोड़ा। पारंपरिक वेशभूषा, तालियों की गूंज और उत्साह से भरे चेहरे यह बता रहे थे कि यह कार्यक्रम केवल बाहर से आए धावकों का नहीं, बल्कि स्थानीय समाज का भी उत्सव था।
विकास योजनाओं का हुआ उल्लेख
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बस्तर क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का जिक्र किया और नई योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण रुका विकास अब तेज़ी से आगे बढ़ेगा और Former Naxalites Mainstream की यह प्रक्रिया और मजबूत होगी।
प्रशासन और नागरिकों की संयुक्त मौजूदगी
कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। सभी की साझा मौजूदगी यह संकेत दे रही थी कि अबूझमाड़ सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि भरोसे और बदलाव की कहानी बन चुका है।




