सीजी भास्कर, 09 जनवरी। नववर्ष 2026 की शुरुआत छत्तीसगढ़ की शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि लेकर आई है। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टिट्यूट में एक अत्यंत जटिल हृदय प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में नया मानक स्थापित किया गया है।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. विवेक चौधरी ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएं (Advanced Cardiac Institute Raipur) की गईं। वर्ष 2009 में जहां विभाग ने मात्र 41 मामलों से शुरुआत की थी, वहीं आज यह केंद्र प्रतिवर्ष 2000 से अधिक उन्नत कार्डियक इंटरवेंशन कर रहा है।
ओपन हार्ट संभव नहीं था, नस के रास्ते बदला गया वाल्व
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि नए साल की पहली बड़ी उपलब्धि के रूप में एक बुजुर्ग महिला पर अत्यंत जोखिमपूर्ण ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया की गई। मरीज लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर से जूझ रही थीं। जांच में सामने आया कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था और हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी।
इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी लगभग असंभव मानी (Advanced Cardiac Institute Raipur) जा रही थी। ऐसे में कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी विभाग ने मिलकर एक विशेष “हार्ट टीम” बनाई। कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के साथ संयुक्त निर्णय लेकर बिना चीर-फाड़ पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का फैसला किया गया।
चिमनी तकनीक और इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी
प्रक्रिया से पहले विशेष सीटी स्कैन विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि मरीज की नसें पतली और कैल्शियम युक्त थीं, साथ ही कोरोनरी धमनियां वाल्व के बेहद करीब थीं, जिससे प्रत्यारोपण के दौरान धमनियों के बंद होने का गंभीर खतरा था।
इस जोखिम से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर वाल्व और धमनियों के बीच “चिमनी” संरचना तैयार की। प्रक्रिया के अंतिम चरण में बाएं पैर की नस में अचानक ब्लॉकेज उत्पन्न हुआ, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर नियंत्रित किया गया।
लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया और हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गई। हृदय की धड़कन स्थिर रही और दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य बना रहा।
पूरी टीम रही अलर्ट मोड पर
अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि प्रक्रिया के दौरान सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। सुरक्षा की दृष्टि से ओपन हार्ट सर्जरी की टीम स्टैंडबाई में रखी गई थी, साथ ही संभावित अनियमित धड़कन को देखते हुए 24 घंटे के लिए टेम्पररी पेसमेकर का बैकअप भी तैयार रखा गया।
यह प्रक्रिया डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव और डॉ. प्रिंस द्वारा संपन्न की गई। कैथलैब टेक्नीशशियन, नर्सिंग स्टाफ और कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञों की भूमिका भी अहम रही।
घर लौटी मरीज, भरोसा और मजबूत
मरीज को हार्ट कमांड सेंटर में रिमोट व्यूइंग तकनीक के जरिए निरंतर निगरानी (Advanced Cardiac Institute Raipur) में रखा गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया। मरीज और उनके परिजनों ने शासकीय चिकित्सा संस्थानों की क्षमता पर भरोसा जताते हुए पूरी टीम और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।


