सीजी भास्कर, 10 फरवरी। स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा के क्षेत्र में एम्स रायपुर ने एक और अहम उपलब्धि अपने (AIIMS Raipur ACES 2026) नाम की है। तीन दिवसीय चौथे वार्षिक कार्डियोवैस्कुलर इमरजेंसीज़ सिम्पोज़ियम (ACES 2026) का रविवार को सफल समापन हुआ। इस सम्मेलन ने न केवल अकादमिक और व्यावहारिक चिकित्सा ज्ञान को नई दिशा दी, बल्कि एम्स रायपुर को हृदय आपातकालीन देखभाल के एक मजबूत राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि कार्डियक इमरजेंसी में समय सबसे निर्णायक कारक होता है। उन्होंने “समय-संवेदनशील” प्रशिक्षण को जीवन रक्षक बताते हुए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं डीन (अकादमिक्स) डॉ. एली मोहापात्रा और डीन (रिसर्च) डॉ. अभिरुचि गलहोत्रा ने आपातकालीन चिकित्सा में शोध, त्वरित निर्णय क्षमता और बेडसाइड मैनेजमेंट की भूमिका को रेखांकित किया।
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण इंडूसेम, फ्लोरिडा (अमेरिका) के अध्यक्ष डॉ. सागर गलवांकर का कीनोट (AIIMS Raipur ACES 2026) व्याख्यान रहा। उन्होंने भारत में हृदय रोगों की बढ़ती चुनौतियों, संसाधन प्रबंधन और भविष्य की उभरती तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. देवेन्द्र के. त्रिपाठी ने बताया कि ACES 2026 का केंद्रबिंदु कार्डियक इमरजेंसी की त्वरित पहचान और शीघ्र उपचार रणनीतियों पर आधारित रहा।
सम्मेलन के दौरान आयोजित व्यावहारिक कार्यशालाओं में रियल-टाइम कार्डियक असेसमेंट, ईसीजी की उन्नत व्याख्या और नर्सिंग स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र शामिल रहे। आयोजन सचिव डॉ. नमन अग्रवाल के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों से 120 से अधिक चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर और नर्सिंग प्रोफेशनल्स ने इस सिम्पोज़ियम में सक्रिय सहभागिता की।
ACES 2026 के सफल आयोजन के साथ एम्स रायपुर ने यह संदेश (AIIMS Raipur ACES 2026) दिया है कि आधुनिक प्रशिक्षण, शोध और टीमवर्क के जरिए कार्डियक इमरजेंसी के क्षेत्र में बेहतर और त्वरित इलाज संभव है। यह सम्मेलन न सिर्फ चिकित्सा पेशेवरों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि हृदय आपातकालीन सेवाओं को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।




