सीजी भास्कर, 17 नवंबर | शुरुआत में ही उठा विवाद – (Amanaka Chaupati Issue)
एनआईटी चौपाटी को आमानाका ले जाने की योजना अब तकरार में बदलने लगी है। जिस जगह को नई लोकेशन बताया जा रहा है, वह जमीन रेलवे की है। हालात तब और बिगड़ गए जब रेलवे ने वहां मौजूद ठेलों पर 7 दिन के भीतर जगह खाली करने का नोटिस चिपका दिया। यह कदम अचानक आया, जिससे पूरे इलाके में असमंजस फैल गया।
स्थानीय नेताओं का निरीक्षण – फैसले पर उठे सवाल
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आमानाका ब्रिज के नीचे का दौरा किया, जहां चौपाटी को शिफ्ट करने की तैयारी बताई जा रही थी।
निरीक्षण के दौरान उन्हें रेलवे का चस्पा किया हुआ नोटिस मिला। इस पर आकाश तिवारी ने कहा—“नगर निगम ने करीब 10–12 करोड़ रुपए खर्च कर चौपाटी बनाई थी, अब उसी फैसले को गलत बताया जा रहा है, लेकिन उन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही जिन्होंने (wrong decision) लिया था।”
ठेला और मैकेनिक दुकानदारों पर संकट गहराया
ब्रिज के नीचे मौजूद लगभग 32 मैकेनिक दुकानदारों के सामने भी दिक्कत पैदा हो गई है। रेलवे ने उन्हें भी नोटिस दिया है। दुकानदारों का कहना है कि न तो शिफ्टिंग स्पष्ट है, न ही व्यापार की सुरक्षा।
उनके मुताबिक (eviction notice) ने उनकी रोज़मर्रा की आय पर सवाल खड़ा कर दिया है और स्थिति हर दिन और तनावपूर्ण होती जा रही है।
नगर निगम ने शिफ्टिंग प्रक्रिया को फिलहाल रोका
नगर निगम की ओर से आमानाका चौपाटी शिफ्ट करने की प्रक्रिया अभी रोक दी गई है। निगम आयुक्त ने कहा कि रेलवे के नोटिस के बाद यह फैसला लिया गया।
उन्होंने बताया कि रेलवे विभाग से बातचीत जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कोई ऐसा समाधान निकलेगा जिससे व्यापारियों की दिक्कतें भी न बढ़ें और वैकल्पिक योजना भी तय हो सके। यह पूरा मामला अभी (administrative review) मोड में चल रहा है।
रेलवे का दावा – जमीन पर पहले से बनी है अलग योजना
रायपुर रेल मंडल के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर चौपाटी शिफ्ट करने की बात हो रही है, उस पर रेलवे पहले ही पार्किंग विकसित करने की योजना बना चुका है।
रेलवे का कहना है कि उन्हें चौपाटी शिफ्टिंग के बारे में किसी तरह का आधिकारिक पत्र या जानकारी नहीं मिली थी, इसलिए नोटिस जारी कर कब्जा खाली करने को कहा गया। रेलवे इसे अपनी (prior land plan) के अनुसार आगे बढ़ाना चाहता है।
चौपाटी हटाने का पुराना विवाद और नालंदा-2 की दिशा
लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च कर बनाई गई एनआईटी चौपाटी पर पहले भी आपत्ति उठती रही है। साल 2023 में सरकार बदलने के बाद यहां नालंदा-2 विकसित करने की योजना को तेज़ी मिली।
नगरीय प्रशासन ने नवंबर 2025 की शुरुआत में बताया कि नालंदा-2 के टेंडर पूरा हो चुका है और 15 नवंबर से शिफ्टिंग तय की गई थी।
लेकिन उससे पहले ही रेलवे ने 32 दुकानदारों को नोटिस देकर जमीन पर अपनी मालिकाना दावेदारी फिर साफ कर दी, जिसके कारण पूरा मामला एक बार फिर (policy confusion) में फंस गया है।





