सीजी भास्कर 8 अप्रैल Ambikapur School News : सरगुजा जिले में निजी स्कूल संचालकों की बढ़ती मनमानी ने अभिभावकों की कमर तोड़ दी है। इस बीच जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) दिनेश झा का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक अभिभावक दफ्तर आकर लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराते, तब तक स्कूलों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा। विभाग के इस “अनोखे फरमान” से पालकों में भारी रोष और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कार्रवाई के नाम पर अभिभावकों में डर का माहौल
DEO की अपील पर अभिभावकों का तर्क है कि वे शिकायत करने से कतरा रहे हैं क्योंकि उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता है। पालकों का आरोप है कि यदि कोई स्कूल के खिलाफ आवाज उठाता है, तो स्कूल प्रबंधन उस बच्चे को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर देता है। पूर्व में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिसके कारण अभिभावक चाहते हैं कि प्रशासन बिना किसी लिखित शिकायत का इंतजार किए स्वतः संज्ञान लेकर स्कूलों पर छापा मारे।
एनसीईआरटी को दरकिनार कर निजी प्रकाशकों का खेल
अंबिकापुर के प्रतिष्ठित स्कूलों में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर एनसीईआरटी (NCERT) की जगह निजी पब्लिकेशंस की महंगी किताबें थोपी जा रही हैं। कार्मेल स्कूल, होली क्रॉस, दिल्ली पब्लिक स्कूल और उर्सु लाइन जैसे संस्थानों की किताबें केवल कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही मिल रही हैं। इन दुकानों पर स्कूलों के नाम के बोर्ड लगे हैं, जहां प्राथमिक कक्षाओं के किताबों के सेट 5 से 7 हजार रुपये जैसी मोटी कीमत पर बेचे जा रहे हैं।
दुकानदारों और स्कूल संचालकों का खुला गठजोड़
अंबिकापुर के नवापारा जैसे इलाकों में किताब दुकानों के बाहर बकायदा रेट लिस्ट चस्पा की गई है। अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है कि वे किताबें ही नहीं, बल्कि कॉपियां भी उन्हीं ब्रांड्स की खरीदें जो स्कूल ने तय की हैं। यह एक संगठित रैकेट की तरह काम कर रहा है, जहां कमीशन के खेल में आम आदमी की जेब काटी जा रही है और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।
कागजों तक सीमित रह गई ‘पालक समिति’
नियमों के अनुसार स्कूलों में अभिभावक समिति का गठन अनिवार्य है, लेकिन सरगुजा के स्कूलों में यह समिति केवल कागजों पर ही जिंदा है। आरोप है कि स्कूल संचालक केवल अपने चहेते और उपकृत अभिभावकों को ही इस कमेटी में रखते हैं। इन सदस्यों से मनचाहे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराकर फीस वृद्धि और निजी किताबों के चयन को वैध रूप दे दिया जाता है, जिससे पूरा शिक्षा तंत्र एक व्यापारिक गढ़ बन गया है।


