यूरिया कालाबाजारी के दोषी पाई गई विजय ट्रेडिंग कंपनी पर 20 हजार का अर्थदंड।
4,065 बोरी यूरिया की बिक्री का कोई प्रमाण नहीं मिला, जांच में उजागर हुई गड़बड़ी।
कलेक्टर ने भविष्य में कंपनी या परिजनों के नाम पर नई अनुज्ञप्ति जारी करने पर लगाई रोक।
सीजी भास्कर, 25 अक्टूबर। सरगुजा कलेक्टर कार्यालय सरगुजा (Ambikapur Urea Black Marketing Case) द्वारा जारी आदेश के अनुसार उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से यूरिया की कालाबाजारी करने पर मेसर्स विजय ट्रेडिंग कंपनी, नवागढ़ खरसिया रोड अंबिकापुर की उर्वरक अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी गई है। साथ ही कंपनी पर 20,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। प्रशासन ने इस कार्रवाई को खाद और उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक सख्त कदम बताया है।
उप संचालक कृषि अंबिकापुर की जांच रिपोर्ट (Ambikapur Urea Black Marketing Case) के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच 95 किसानों को 4,743 बोरी यूरिया प्रदाय दिखाया गया था, जबकि भौतिक सत्यापन में केवल 678 बोरी ही किसानों द्वारा खरीदी गई पाई गई। शेष 4,065 बोरी यूरिया की बिक्री का कोई दस्तावेज़ी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे स्पष्ट रूप से कालाबाजारी की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि यूरिया की बड़ी मात्रा अवैध चैनलों के माध्यम से बाजार में ऊंचे दामों पर बेची गई थी।
अतः विजय ट्रेडिंग कंपनी (Ambikapur Urea Black Marketing Case) का यह कृत्य उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत गंभीर उल्लंघन माना गया है। कलेक्टर कार्यालय ने उप संचालक कृषि अंबिकापुर को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर अर्थदंड की राशि वसूल कर शासन के खाते में जमा कराई जाए तथा 7 दिवस के भीतर कंपनी की अनुज्ञप्ति रद्द करने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
इसके साथ ही यह भी आदेशित किया गया है कि भविष्य में संबंधित कंपनी या उसके किसी परिवारजन के नाम पर नई अनुज्ञप्ति जारी नहीं की जाएगी। प्रशासन ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि किसानों के हितों से जुड़ी योजनाओं और कृषि सामग्रियों की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाने पर इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।


