सीजी भास्कर, 23 जनवरी | Amrit Mission Jagdalpur : जगदलपुर शहर में स्थायी पेयजल व्यवस्था अब भी इंतजार की सूची में है। जिस योजना से घर-घर नल का पानी पहुंचने की उम्मीद जगी थी, वही योजना समय के साथ अधूरी तस्वीर बन गई। 2016 में शुरू हुए अमृत जल मिशन का मकसद 25 हजार घरों तक नियमित जल आपूर्ति था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कई इलाकों में (Urban Drinking Water) का भरोसा टैंकरों पर ही टिका है।
हर गर्मी में बढ़ता टैंकरों का बोझ
गर्मी आते ही शहर की परेशानी खुलकर सामने आ जाती है। 48 वार्डों में से लगभग 12 वार्ड हर साल ड्राई जोन घोषित होते हैं। इन क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह टैंकरों से होती है। नगर निगम के पास मौजूद 35 टैंकरों में से करीब 10 टैंकर खराब हालत में बताए जा रहे हैं, जिससे (Water Tanker Dependency) और गहरी हो जाती है।
अमृत मिशन की रफ्तार क्यों थमी?
करीब 110 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना को 2019 तक पूरा होना था, लेकिन एजेंसी में बदलाव और फंड की कमी के चलते काम बीच रास्ते में अटक गया। पाइपलाइन बिछाने से लेकर ट्रीटमेंट सिस्टम तक कई हिस्से अधूरे हैं। यही वजह है कि (Jagdalpur Water Crisis) हर साल नई चिंता बनकर उभरती है।
राशि स्वीकृत, पर भरोसा अब भी अधूरा
नगर निगम का कहना है कि हाल ही में 6 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, जबकि 15 करोड़ अतिरिक्त फंड की मांग शासन से की गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि रकम मिलते ही काम दोबारा गति पकड़ेगा। हालांकि, शहरवासियों का सवाल अब भी वही है—क्या इस बार वाकई बदलाव दिखेगा, या टैंकर ही सहारा बने रहेंगे?
जनता की आवाज: कब मिलेगा नल से पानी?
लंबे इंतजार ने लोगों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। नागरिकों का कहना है कि हर गर्मी में अस्थायी इंतजाम समाधान नहीं हो सकता। जब तक अमृत जल मिशन जमीन पर पूरा नहीं उतरता, तब तक शहर की प्यास और सवाल दोनों बने रहेंगे।


