सीजी भास्कर, 5 दिसम्बर। छत्तीसगढ़ में जबरन और लालच देकर कराए जा रहे धर्म परिवर्तन (Anti-Conversion Bill Chhattisgarh) को लेकर सरकार अब निर्णायक रुख अपनाने जा रही है। विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार शीतकालीन सत्र में नया मतांतरण-विरोधी विधेयक पेश करने की तैयारी में है। विधानसभा का यह सत्र 14 से 17 दिसंबर के बीच होना तय है और माना जा रहा है कि सरकार इसी दौरान कानून को सदन में रखेगी—जो सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री के प्रमुख वादों में से एक था।
9 राज्यों के कानूनों का अध्ययन, 17 प्रावधानों वाला मसौदा तैयार
इस प्रस्तावित कानून का ढांचा छोटा है—मात्र पाँच पृष्ठ—लेकिन इसमें 17 से अधिक ठोस और कड़े प्रावधान (Anti-Conversion Bill Chhattisgarh) जोड़े गए हैं। मसौदा तैयार करने से पहले सरकार ने ओडिशा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित नौ राज्यों में लागू धर्म स्वतंत्रता अधिनियमों का विस्तार से अध्ययन किया। उद्देश्य है—जबरन धर्मांतरण की हर संभावित राह पर रोक लगाने वाली व्यवस्थित कानूनी ढाल बनाना।
क्या होगा नया प्रावधान?—प्रलोभन, धोखाधड़ी या दबाव से धर्मांतरण हुआ तो सज़ा भारी
प्रस्तावित कानून के मुख्य बिंदु इस प्रकार समझे जा रहे हैं—
जबरन या लालच आधारित मतांतरण पर अधिकतम 10 वर्ष की सजा
धर्म परिवर्तन से 60 दिन पूर्व जिला प्रशासन को सूचना अनिवार्य
बिना सूचना धर्म परिवर्तन कराने वालों पर दंड सहित कड़ी कार्रवाई
‘प्रलोभन’ और ‘जबरन मतांतरण’ की परिभाषा और अधिक स्पष्ट और विस्तृत
कानून पुराने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 को पूरी तरह प्रतिस्थापित करेगा
अब तक के कानून में जबरन मतांतरण पर अधिकतम 1 वर्ष कैद और 5,000 रुपये जुर्माना था। नए प्रावधान लागू होने पर सजा की अवधि और दंड दोनों कई गुना अधिक सख्त हो जाएंगे।
आदिवासी इलाकों में तनाव ने बढ़ाई कानून की जरूरत
बस्तर, जशपुर, रायगढ़ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में बीते वर्षों में मतांतरण (Anti-Conversion Bill Chhattisgarh ) को लेकर कई बार तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी। कई स्थानों पर सामाजिक विभाजन गहराया, और प्रशासन को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा। इन्हीं घटनाओं ने एक सख़्त, स्पष्ट और व्यावहारिक क़ानून की मांग तेज़ की—जिस पर अब सरकार अंतिम रूप देती दिख रही है।






