सीजी भास्कर, 16 सितंबर। अपोलो टायर्स भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी का नया प्रायोजक होगा। आनलाइन गेमिंग एप पर प्रतिबंध लगाने के कारण ड्रीम-11 के हट जाने के बाद भारतीय टीम बिना प्रायोजक के ही एशिया कप में खेल रही है। अपोलो टायर्स ने 579 करोड़ रुपये में तीन वर्ष के लिए बीसीसीआइ के साथ करार किया है। बीसीसीआइ ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अपोलो टायर्स (Apollo Tyres Jersey Sponsorship) एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है जिसका मुख्यालय गुरुग्राम में है। टायर निर्माता कंपनी की भारत और यूरोप सहित विदेशों में विनिर्माण इकाइयां हैं।
अपोलो टायर्स ने कैनवा और जेके सीमेंट्स जैसी कंपनियों को पछाड़ा। कैनवा ने 544 करोड़ और जेके सीमेंट्स ने 477 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। अपोलो टायर्स के तीन साल की इस करार (Apollo Tyres Jersey Sponsorship) में 121 द्विपक्षीय मुकाबले और 21 आइसीसी मैच शामिल होंगे। प्रति मैच यह प्रायोजन लगभग 4.77 करोड़ रुपये का बैठेगा, हालांकि द्विपक्षीय और आइसीसी मैचों में कीमतों में अंतर के कारण यह आंकड़ा थोड़ा बदल सकता है।
बीसीसीआइ ने द्विपक्षीय मैचों के लिए आधार मूल्य 3.5 करोड़ और आइसीसी मैचों के लिए 1.5 करोड़ रुपये रखा था। दरअसल, सरकार ने रीयल मनी गेमिंग कंपनियों पर रोक लगाने के बाद ड्रीम-11 का सौदा (Apollo Tyres Jersey Sponsorship) रद कर दिया गया था। नए प्रायोजक अपोलो टायर्स का लोगो पहली बार भारत ‘ए’ बनाम आस्ट्रेलिया ‘ए’ वनडे सीरीज में दिखाई देगा। ये सीरीज 30 सितंबर से खेली जाएगी।
इसके बाद अपोलो टायर्स का लोगो भारतीय टीम की जर्सी पर आधिकारिक तौर पर दो अक्टूबर से वेस्टइंडीज के विरुद्ध घरेलू टेस्ट सीरीज और आस्ट्रेलिया दौरे पर सीमित ओवरों की सीरीज में नजर आएगा। बोली की प्रक्रिया मुंबई में बीसीसीआइ मुख्यालय में हुई, जिसमें अपोलो टायर्स (Apollo Tyres Jersey Sponsorship) ने मुंबई आधारित डब्ल्यूपीपी मीडिया के मार्गदर्शन में विजयी बोली लगाई। दिलचस्प बात यह रही कि उद्योग जगत में शुरू में आशंका जताई जा रही थी कि सरकार के प्रतिबंध के बाद बीसीसीआई को प्रायोजक मिलना मुश्किल होगा। लेकिन नतीजा इसके उलट रहा बोर्ड को ड्रीम-11 से करीब 200 करोड़ रुपये ज्यादा का करार मिल गया।





