सीजी भास्कर, 03 दिसंबर| टेक दुनिया में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। Apple के सबसे (Apple Vision Pro Failure) महंगे और चर्चित मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट Apple Vision Pro को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जिस प्रोडक्ट को Apple का “फ्यूचर ऑफ कंप्यूटिंग” कहा जा रहा था, वही अब कमजोर डिमांड और सीमित उपयोग के चलते कंपनी के लिए चुनौती बनता दिख रहा है।
इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने Vision Pro के प्रोडक्शन और मार्केटिंग दोनों में बड़ी कटौती कर दी है। इससे यह साफ हो गया है कि कंपनी इस प्रोडक्ट को लेकर अपनी शॉर्ट-टर्म रणनीति पर दोबारा सोच रही है।
प्रोडक्शन और विज्ञापन खर्च में अचानक ब्रेक
इंटरनेशनल रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple के मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर Luxshare ने 2024 की शुरुआत में Vision Pro का प्रोडक्शन लगभग रोक दिया था। लॉन्च के बाद अब तक कुल मिलाकर सिर्फ करीब 3.9 लाख यूनिट्स ही शिप हो पाई हैं।
वहीं डिजिटल मार्केटिंग पर नजर डालें तो तस्वीर और भी साफ (Apple Vision Pro Failure) हो जाती है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बड़े बाजारों में Vision Pro के लिए 95% से ज्यादा डिजिटल एडवरटाइजिंग खर्च घटा दिया गया है। यह संकेत देता है कि Apple फिलहाल इस प्रोडक्ट को आक्रामक तरीके से पुश करने के मूड में नहीं है।
बिक्री के आंकड़े और सीमित विस्तार
Apple ने Vision Pro की आधिकारिक बिक्री संख्या कभी सार्वजनिक नहीं की, लेकिन इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2025 की आखिरी तिमाही तक इसकी शिपमेंट घटकर करीब 45 हजार यूनिट्स रह सकती है। तुलना करें तो iPhone, iPad या MacBook जैसे प्रोडक्ट्स के मुकाबले यह आंकड़ा बेहद छोटा है।
$3,499 (करीब 3 लाख रुपये) की शुरुआती कीमत वाला यह हेडसेट अभी सिर्फ 13 देशों में ही उपलब्ध है और 2025 में किसी नए बड़े बाजार में इसका विस्तार नहीं किया गया। ऊंची कीमत ने इसे मास कंज्यूमर से काफी दूर रखा।
कीमत, वजन और ऐप्स बने सबसे बड़े रोड़े
टेक एनालिस्ट्स मानते हैं कि Vision Pro की धीमी रफ्तार के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं—
बेहद ऊंची कीमत
भारी और लंबे समय तक पहनने में असहज डिजाइन
VisionOS के लिए सीमित ऐप्स
Apple के प्लेटफॉर्म पर फिलहाल करीब 3,000 ऐप्स ही ऐसे हैं, जो खास तौर पर Vision Pro के लिए बनाए गए हैं। आम यूज़र के लिए यह इकोसिस्टम अभी उतना मजबूत नहीं है, जितना लॉन्च के वक्त दिखाया गया था।
पूरे VR मार्केट की हालत भी कमजोर
यह समस्या सिर्फ Apple तक सीमित नहीं है। Counterpoint Research के अनुसार, ग्लोबल VR हेडसेट मार्केट में सालाना आधार पर करीब 14% की गिरावट दर्ज की गई है।
इस सेगमेंट में Meta के Quest डिवाइसेज की हिस्सेदारी लगभग (Apple Vision Pro Failure) 80% है, लेकिन Meta ने भी हाल के महीनों में अपने VR विज्ञापन खर्च में कटौती की है।
Apple की नई दिशा: स्मार्ट ग्लासेस और एंटरप्राइज फोकस
हालांकि Apple ने Vision Pro को पूरी तरह छोड़ा नहीं है। अक्टूबर में कंपनी ने इसका अपग्रेडेड वर्जन लॉन्च किया, जिसमें नया चिप, बेहतर बैटरी और नया हेडबैंड दिया गया। इसके साथ ही Apple अब सस्ते और हल्के वर्जन पर काम कर रहा है।
इसके अलावा Apple का फोकस अब कंज्यूमर से हटकर एंटरप्राइज यूज की ओर जाता दिख रहा है—जैसे पायलट ट्रेनिंग, मेडिकल सर्जरी और इंडस्ट्रियल सिमुलेशन। साथ ही, कंपनी अब Meta की तरह स्मार्ट ग्लासेस कैटेगरी में भी निवेश बढ़ा रही है।
तो क्या Vision Pro फेल हो गया?
Vision Pro को पूरी तरह “फेल” कहना शायद जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना साफ है कि यह Apple की उम्मीदों पर फिलहाल खरा नहीं उतर पाया है। कंज्यूमर मार्केट में इसकी पकड़ कमजोर है और अब Apple को इसे नए रूप और नई रणनीति के साथ दोबारा पेश करना होगा। आने वाले साल तय करेंगे कि Vision Pro एक असफल प्रयोग बनता है या फिर Apple इसे धीरे-धीरे मेनस्ट्रीम टेक्नोलॉजी में बदल पाता है।


