सीजी भास्कर, 30 सितंबर। स्वदेशी इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप Arattai इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। व्हाट्सऐप जैसे फीचर्स से लैस यह ऐप लॉन्च होते ही ऐप स्टोर पर टॉप पर पहुंच गया। इस ऐप के पीछे हैं जोहो कॉर्पोरेशन (Zoho Corporation) के फाउंडर और अरबपति एंटरप्रेन्योर श्रीधर वेम्बु, जिनकी नेटवर्थ करीब 5.8 अरब डॉलर (8850 करोड़ रुपये) है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संपत्ति (Arattai App Founder) होने के बावजूद वे आज भी गांव में सादगी से रहना पसंद करते हैं और अक्सर साइकिल पर घूमते दिखाई देते हैं।
आईआईटी से लेकर अमेरिका तक का सफर
श्रीधर वेम्बु का जीवन सफर युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।
1989 में उन्होंने आईआईटी मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।
इसके बाद प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, अमेरिका से पीएचडी की डिग्री हासिल की।
शुरुआती करियर में वे क्वालकॉम में सिस्टम डिजाइन इंजीनियर बने, लेकिन नौकरी (Arattai App Founder) उन्हें रास नहीं आई और उन्होंने खुद का बड़ा सपना देखने का फैसला किया।
जोहो कॉर्प की शुरुआत
90 के दशक में श्रीधर वेम्बु ने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर AdventNet की नींव रखी, जो आगे चलकर (Arattai App Founder) Zoho Corporation बन गया।
आज जोहो दुनिया की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में गिनी जाती है।
कंपनी का 2023-24 का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8,703 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी का कुल वैल्यूएशन 1.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
अरबपति होकर भी गांव की सादगी
फोर्ब्स की 2024 लिस्ट में वेम्बु भारत के 51वें सबसे अमीर व्यक्ति बने।
2018 में उनकी नेटवर्थ 1.6 अरब डॉलर थी, जो 2024 में बढ़कर 5 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई।
इसके बावजूद उन्होंने तमिलनाडु के तेनकाशी और तंजावुर जैसे गांवों में रहना चुना।
वे अक्सर गांव की गलियों में साइकिल से सफर करते हैं, जिससे उनकी छवि एक जमीन से जुड़े इंसान की बनी हुई है।
आईपीओ पर जवाब
Arattai की सफलता के बाद जब Zoho के IPO को लेकर चर्चा तेज हुई, तो श्रीधर वेम्बु ने साफ कहा कि कंपनी का फिलहाल पब्लिक होने का कोई इरादा नहीं है।
उनका कहना है कि – “हमारे इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स बिना किसी दबाव के सफल हुए हैं, और यही हमारी असली ताकत है।”


