Aravalli Conservation NCR : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अरावली पर्वतमाला को दिल्ली-एनसीआर के लिए “प्राकृतिक ढाल” बताते हुए उसके संरक्षण को समय की सबसे बड़ी जरूरत करार दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अरावली कमजोर हुई, तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को प्रदूषण, जल संकट और तापमान असंतुलन से कोई नहीं बचा पाएगा। यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है।
हवा, पानी और जैव विविधता की रीढ़
अखिलेश यादव के अनुसार अरावली पर्वतमाला एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। बारिश के पैटर्न से लेकर भूजल रिचार्ज तक, अरावली की मौजूदगी पूरे क्षेत्र के जल संतुलन को संभालती है। उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स का संरक्षण, पक्षियों की वापसी और हरित आवरण का संतुलन सीधे तौर पर अरावली से जुड़ा हुआ है (Air Quality Protection)।
बढ़ता तापमान और स्वास्थ्य पर असर
उन्होंने चिंता जताई कि अरावली के कमजोर होने से दिल्ली-एनसीआर में तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं होने के बावजूद लोग यहां इलाज कराने से डरने लगे हैं (Public Health Impact)।
अर्थव्यवस्था पर भी मंडराता खतरा
अखिलेश यादव ने आगाह किया कि अगर पर्यावरणीय हालात नहीं सुधरे, तो दिल्ली-एनसीआर अपनी आर्थिक पहचान भी खो सकता है। पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, खेल आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभावित होंगे। होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी सेवाएं, छोटे व्यापारी और स्थानीय रोजगार पर इसका गहरा असर पड़ेगा, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो सकती है (Economic Sustainability)।
आवाजाही से लेकर रिश्तों तक असर
उन्होंने कहा कि प्रदूषण बढ़ने से हवाई, रेल और सड़क परिवहन बाधित होगा। लोग यहां आने से बचेंगे, निवेश घटेगा और यहां तक कि लोग निजी फैसलों में भी दिल्ली-एनसीआर के पर्यावरण को ध्यान में रखने लगेंगे। यह संकेत है कि समस्या केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक ढांचे को भी प्रभावित कर रही है (Urban Livability)।
सामूहिक जिम्मेदारी का समय
अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता के आसपास रहने वाले लोगों को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि वे सुरक्षित हैं। अरावली का विनाश सबके लिए खतरा है। अवैध खनन और अनियंत्रित विकास अगर नहीं रुका, तो राजधानी क्षेत्र को रहने लायक बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आम नागरिकों, व्यापारियों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों से अरावली संरक्षण अभियान में जुड़ने की अपील की।





