20.53 करोड़ रुपये की लागत से एनटीपीसी के CSR फंड से बनेगा केंद्र
10.27 एकड़ भूमि में आर्चरी रेंज, हॉस्टल, हेल्थ और स्किल सेंटर तैयार होंगे
2036 ओलंपिक लक्ष्य के लिए छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलेगा मंच
3 करोड़ रुपये तक का इनाम ओलंपिक पदक विजेताओं को दिया जाएगा
सीजी भास्कर, 28 अक्टूबर। सन्ना तहसील के पंडरापाठ में आधुनिक सुविधाओं से लैस एक बड़ा तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र (Archery Training Center) बनने जा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और एनटीपीसी के बीच हुए एग्रीमेंट में इस परियोजना को हरी झंडी मिल गई। इस केंद्र का निर्माण एनटीपीसी के सीएसआर फंड से 20 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा।
कांसाबेल ब्लॉक के बगिया स्थित सीएम कैंप कार्यालय में हुए इस एग्रीमेंट के दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, एनटीपीसी के एजीएम (मानव संसाधन) बिलाश मोहंती, डिप्टी जीएम निशांत बंसल, विधि प्रबंधक गैरिक गुरु और डिप्टी कलेक्टर समीर बड़ा उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनटीपीसी द्वारा स्थापित यह आर्चरी सेंटर (Archery Training Center) जशपुर क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा। यहां की धरती में तीरंदाजी की गहरी परंपरा रही है। उन्होंने कहा, “वर्ष 2036 में भारत ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए दावेदारी पेश कर चुका है। हमारी कोशिश होगी कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में शामिल होकर पदक जीतें।”
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़ रुपये, रजत विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने लंबित राज्य खेल अलंकरण समारोह को पुनः आयोजित करने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सम्मानित करने की बात कही।
दस एकड़ भूमि में बनेगा अत्याधुनिक केंद्र
सन्ना के पंडरापाठ में 10.27 एकड़ भूमि में बनने वाला यह तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र (Archery Training Center) अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। यहां आउटडोर आर्चरी रेंज, खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, पुस्तकालय, चिकित्सा केंद्र, कौशल विकास केंद्र और हर्बल वृक्षारोपण की व्यवस्था होगी।
यहां जैविक खेती के लिए छायादार नर्सरी और प्रशिक्षण मैदान भी तैयार किए जाएंगे। धनुष-बाण के इस प्राचीन खेल को वैज्ञानिक ढंग से सिखाया जाएगा। लक्ष्य पर निशाना लगाने की तकनीक, शरीर की स्थिरता और मानसिक एकाग्रता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Archery Training Center भारत में तीरंदाजी की गौरवशाली परंपरा
महाभारत और रामायण जैसे पौराणिक ग्रंथों में धनुर्विद्या का उल्लेख मिलता है। यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक कला भी है जिसमें मानसिक और शारीरिक संतुलन आवश्यक है। आधुनिक युग में भारत की दीपिका कुमारी जैसी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमें उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रशिक्षित आर्चर्स तैयार करने होंगे।”
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि जनजातीय क्षेत्रों में खेल अधोसंरचना को प्राथमिकता दी जाए। राज्य में खेलो इंडिया सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतियोगिता का प्लेटफॉर्म मिल सके। उन्होंने कहा कि जशपुर की यह परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश की खेल राजधानी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
डीएमएफ से चल रहा है प्रशिक्षण केंद्र
फिलहाल जिला मुख्यालय जशपुर में डीएमएफ के सहयोग से संचालित एकलव्य अकादमी में ताईक्वांडो, तैराकी और तीरंदाजी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अकादमी के प्रशिक्षु युवाओं ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।


