सीजी भास्कर 22 फरवरी Arpa Bhainsajhar Land Scam: बिलासपुर में अरपा–भैंसाझार परियोजना से जुड़े भू-अर्जन मामले में कार्रवाई तेज हुई है। प्रशासनिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद जल संसाधन विभाग के तत्कालीन एसडीओ और उप अभियंता को निलंबित किया गया। इससे पहले तत्कालीन तखतपुर एसडीएम पर कार्रवाई हो चुकी थी, अब तकनीकी स्तर पर जिम्मेदारी तय होने से (Bilaspur Land Acquisition Case) की परतें और खुलती दिख रही हैं।
एक ही खसरे पर दोहरी एंट्री, करोड़ों की गड़बड़ी
जांच में सामने आया कि चकरभाठा वितरक नहर के लिए अधिग्रहण के दौरान एक ही खसरे को अलग-अलग रकबे में दिखाकर मुआवजा तय किया गया। दस्तावेज़ी हेरफेर से शासन को करीब 3.42 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन किया गया है। रिकॉर्ड मिलान में विसंगतियां, मुआवजा फाइलों में कट-छांट और भुगतान ट्रैक में असंगतियां (Chhattisgarh Land Scam) की ओर इशारा करती हैं।
विभागीय आदेश से दोनों इंजीनियर बाहर
जल संसाधन विभाग ने आदेश जारी कर तत्कालीन एसडीओ एस.एल. द्विवेदी और उप अभियंता आर.के. राजपूत को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत निलंबित किया है। आरोप है कि तकनीकी स्वीकृतियों और फील्ड रिपोर्टिंग में लापरवाही, या मिलीभगत, से भुगतान का रास्ता खुला। यह कदम (Water Resources Officers Suspended) के तौर पर विभागीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है।
नहर एलाइनमेंट बदला गया, निजी लाभ का आरोप
जांच रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि नहर का एलाइनमेंट बदले जाने से कुछ निजी हितों को लाभ पहुंचा, जिससे मुआवजा राशि में असंतुलन पैदा हुआ। तकनीकी बदलावों के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं। फाइल नोटिंग, साइट निरीक्षण रिपोर्ट और भुगतान स्वीकृतियों की क्रॉस-वेरिफिकेशन अब केस की दिशा तय करेगी—यह पूरा प्रकरण (Arpa Bhainsajhar Land Scam) की गंभीरता को रेखांकित करता है।
पहले की जांच, अब दोबारा कार्रवाई
पूर्व में गठित जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर पटवारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो चुकी थी और तत्कालीन एसडीएम का निलंबन हुआ था। नए सिरे से समीक्षा में इंजीनियरिंग विंग की भूमिका सामने आने पर विभागीय शिकंजा कसा गया। आगे वित्तीय लेन-देन, फाइल मूवमेंट और ऑन-ग्राउंड वेरिफिकेशन के आधार पर केस आगे बढ़ेगा—यह (Bilaspur Land Acquisition Case) में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।






