दुर्ग जिले की शिक्षिका के. शारदा ने एक अनोखी पहल करते हुए Audio Books for Blind Students तैयार करने का अभियान शुरू किया है। खुद दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने ब्लाइंड बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाने की दिशा में बड़ा काम किया है। महज डेढ़ साल के भीतर उन्होंने 3800 से ज्यादा ऑडियो बुक्स तैयार कर दी हैं। इन किताबों की मदद से ऐसे छात्र, जिन्हें सामान्य किताबें पढ़ने में दिक्कत होती है, अब आसानी से अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं।
एक मुलाकात से शुरू हुआ मिशन
वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने के बाद शारदा का संपर्क ब्लाइंड बच्चों के एक समूह से हुआ। बातचीत के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं है। इसी अनुभव ने उन्हें Inclusive Education की दिशा में काम करने की प्रेरणा दी। उन्होंने तय किया कि ऑडियो फॉर्मेट में ऐसी सामग्री तैयार की जाए, जिससे दृष्टिबाधित बच्चों को भी पढ़ाई में वही अवसर मिल सके जो अन्य छात्रों को मिलते हैं।
इंटरनेट से सीखी तकनीक, शुरू किया रिकॉर्डिंग का काम
शारदा बताती हैं कि उन्होंने ऑडियो बुक बनाने की तकनीक किसी विशेष प्रशिक्षण से नहीं, बल्कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से सीखी। 25 अक्टूबर 2024 से उन्होंने नियमित रूप से Audio Learning के लिए किताबों की रिकॉर्डिंग शुरू की। धीरे-धीरे यह काम एक मिशन में बदल गया और आज उनके द्वारा तैयार की गई हजारों ऑडियो बुक्स छात्रों तक पहुंच रही हैं।
छठवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई का पूरा कंटेंट
तैयार की जा रही ऑडियो किताबें कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए हैं। इनमें अलग-अलग विषयों के पाठ, कहानियां और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। शुरुआत में यह सामग्री छत्तीसगढ़ बोर्ड के आधार पर तैयार की जा रही थी, लेकिन अब शारदा NCERT Audio Books के पैटर्न पर भी काम कर रही हैं, ताकि देशभर के छात्रों को इसका लाभ मिल सके।
स्थानीय भाषा और संस्कृति को भी मिला स्थान
ऑडियो बुक्स की खास बात यह है कि इनमें केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि स्थानीय भाषा और संस्कृति से जुड़ी सामग्री भी शामिल की गई है। छत्तीसगढ़ी और हल्बी भाषा में भी कंटेंट तैयार किया गया है, जिससे क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले छात्रों को भी पढ़ाई समझने में आसानी हो। शारदा का मानना है कि शिक्षा तभी प्रभावी बनती है, जब वह स्थानीय समाज और संस्कृति से जुड़ी हो।
स्कूल के बाद खाली समय में जारी रहता है काम
शारदा दिनभर स्कूल में पढ़ाने के बाद शाम और रात के समय ऑडियो बुक्स तैयार करती हैं। अपनी टीम के साथ वह किताबों की रिकॉर्डिंग करती हैं और फिर उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है। फिलहाल उनके द्वारा बनाई गई 3800 से ज्यादा ऑडियो किताबें विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग कई राज्यों के छात्र कर रहे हैं।
किताबें लिखने और डिजिटल शिक्षा में भी सक्रिय
ऑडियो बुक्स के अलावा शारदा अब तक 25 से ज्यादा किताबें भी लिख चुकी हैं। इनमें गणित, नैतिक कहानियां और पढ़ाई को आसान बनाने वाली सामग्री शामिल है। उन्होंने पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए क्यूआर कोड वाली गणित पुस्तिका भी तैयार की है, जिसमें मोबाइल से स्कैन करते ही संबंधित पाठ का वीडियो खुल जाता है। डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए वह नेशनल मेंटर के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।





