सीजी भास्कर, 05 फरवरी। आयुष्मान आरोग्य मंदिर के तहत संचालित डीडी नगर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (Ayushman Arogya Mandir) इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। शुरुआत में यह केंद्र सुचारु रूप से चल रहा था और स्टाफ की भी पर्याप्त उपलब्धता थी, लेकिन समय के साथ कर्मचारियों का अन्य स्थानों पर स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद से रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां नहीं हो सकीं, जिससे व्यवस्थाएं धीरे-धीरे चरमराती चली गईं।
लगभग एक वर्ष से स्टाफ की भारी कमी और प्रशासनिक उदासीनता का असर अस्पताल की सेवाओं पर साफ नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि शुगर जांच की मशीन मौजूद होने के बावजूद स्ट्रिप्स नहीं होने से जांच बंद पड़ी है। खून जांच की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। कई बुनियादी जांच और उपचार सेवाएं यहां पूरी तरह नदारद हैं।
दिलचस्प बात यह है कि रायपुर के अन्य वार्डों में स्थित हमर अस्पताल राजा तालाब, सिटी अस्पताल गुड़ियारी, भाटागांव, रामनगर, मठपुरैना और खो-खो पारा जैसे केंद्रों में अपेक्षाकृत बेहतर सुविधाएं (Ayushman Arogya Mandir) उपलब्ध हैं, जबकि डीडी नगर जैसे बड़े वार्ड का अस्पताल सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है।
बताया जा रहा है कि मेकाहारा से महज दो किलोमीटर दूर स्थित हमर अस्पताल में सुविधाएं बेहतर हैं, वहीं मेकाहारा से लगभग सात किलोमीटर दूर डीडी नगर के इस स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों की भारी कमी बनी हुई है।
एक डॉक्टर के भरोसे पूरा अस्पताल
वर्तमान में अस्पताल में केवल एक डॉक्टर, डॉ. प्रणव कुमार वर्मा, पदस्थ हैं। वे सांध्यकालीन अस्पताल में न सिर्फ मरीजों का इलाज कर रहे हैं, बल्कि कंपाउंडर, दवा वितरण और कई बार पंजीयन जैसे कार्य भी खुद ही संभालने को मजबूर हैं। बढ़ती मरीज संख्या के बीच एक ही व्यक्ति पर पूरा भार होने से इलाज और दवा वितरण में चूक की आशंका बनी रहती है।
राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े (Ayushman Arogya Mandir) करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ अस्पतालों में आवश्यकता से अधिक स्टाफ पदस्थ है, जबकि डीडी नगर जैसे क्षेत्रों में भारी कमी बनी हुई है। इसे लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी और आक्रोश का माहौल है।
स्थानीय नागरिकों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि डीडी नगर आयुष्मान आरोग्य मंदिर में तत्काल पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति कर सभी जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल की जाएं, ताकि क्षेत्रवासियों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।




