सीजी भास्कर, 31 दिसंबर। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) छत्तीसगढ़ चैप्टर ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat Pending Payment) के तहत अस्पतालों के लंबित भुगतान को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एएचपीआई छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने मुख्य सचिव विकासशील और स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को पत्र लिखकर आयुष्मान योजना के अंतर्गत लंबे समय से अटके भुगतान को शीघ्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लगातार भुगतान लंबित रहने से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन संकट में पड़ गया है और इसका सीधा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ सकता है।
डॉ. गुप्ता ने पत्र में स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ के निजी अस्पतालों को जनवरी से मार्च 2025 की अवधि में आयुष्मान भारत पीएमजय योजना के तहत किए गए उपचार का पूर्ण भुगतान अब तक नहीं मिला है। एएचपीआई छत्तीसगढ़ के प्रयासों के बाद कुछ चुनिंदा अस्पतालों को आंशिक भुगतान जरूर हुआ, लेकिन अब भी बड़ी राशि बकाया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनेक लंबित प्रकरणों को बिना अस्पतालों का पक्ष सुने जिला और राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समितियों (DGRC और SGRC) में एकतरफा तरीके से निरस्त कर दिया गया, जिसे एएचपीआई ने अन्यायपूर्ण और विधि विरुद्ध बताया है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 से संबंधित डीजीआरसी और एसजीआरसी के कई मामलों में भुगतान की सहमति बन चुकी है, बावजूद इसके उन मामलों में भी राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच लगातार दबाव और काम बंद करने के आह्वान के बाद आंशिक भुगतान हुआ था, लेकिन पिछले पांच महीनों से फिर से भुगतान पूरी तरह रुका हुआ है। इस स्थिति के कारण निजी अस्पतालों को संचालन में भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
एएचपीआई छत्तीसगढ़ ने आगाह किया है कि वर्तमान हालात में अस्पताल आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य इलेक्टिव इलाज के मरीजों को लौटाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। आने वाले समय में, खासकर धान खरीदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब बड़ी संख्या में लोग इलेक्टिव इलाज के लिए अस्पतालों का रुख करेंगे, तब उन्हें इलाज मिलने में गंभीर बाधाएं आ सकती हैं। इससे आयुष्मान योजना के प्रति आम जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है।
डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि बीते दो वर्षों में हर छह महीने के अंतराल पर भुगतान (Ayushman Bharat Pending Payment) लंबित होना राज्य सरकार की आयुष्मान योजना के प्रति प्रतिबद्धता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इसे रोकने के लिए प्रति माह पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने उच्चाधिकारियों से आग्रह किया है कि अस्पतालों के बकाया भुगतान को शीघ्र जारी किया जाए तथा डीजीआरसी और एसजीआरसी की नियमित, विधिसम्मत मासिक बैठकें आयोजित कर विवादित मामलों का समाधान किया जाए।
एएचपीआई छत्तीसगढ़ द्वारा भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी भारत सरकार, नई दिल्ली, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ और आयुष्मान भारत पीएमजय योजना छत्तीसगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी भेजी गई है, ताकि आयुष्मान योजना की विश्वसनीयता बनी रहे और मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


