सीजी भास्कर, 10 जनवरी। राज्य में निजी अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Yojana Payment Crisis) के तहत फ्री इलाज की व्यवस्था एक बार फिर डगमगा गई है। दिवाली से पहले से ही निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के भुगतान नहीं किए गए हैं। बकाया राशि बढ़कर अब करीब 600 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। इसका सीधा असर छोटे और मंझोले निजी अस्पतालों पर पड़ा है, जहां आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
स्थिति यह है कि लोन लेकर अस्पताल (Ayushman Yojana Payment Crisis) शुरू करने वाले कई प्रबंधन अब ईएमआई चुकाने में असमर्थ हो गए हैं। इसी कारण राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में लगभग 200 छोटे और मंझोले निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत फ्री इलाज बंद कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
सरकारी और निजी अस्पतालों पर बराबर दबाव
आयुष्मान योजना (Ayushman Yojana Payment Crisis) के तहत जितने मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लगभग उतने ही मरीज निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। स्वास्थ्य विभाग हर साल औसतन करीब 2500 करोड़ रुपए गरीब मरीजों के इलाज पर निजी अस्पतालों को भुगतान करता है। इसके बावजूद हर चार से पांच महीने में भुगतान अटकना लगभग नियमित समस्या बन चुकी है। जब भी भुगतान रुकता है, उसका सीधा असर इलाज की व्यवस्था पर पड़ता है। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बन गए हैं। भुगतान रुकते ही निजी अस्पतालों ने पहले गैर-आपात सेवाएं और फिर धीरे-धीरे इमरजेंसी में भी फ्री इलाज सीमित करना शुरू कर दिया है।
भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ ने उठाया मुद्दा
निजी अस्पतालों में मरीजों को हो रही परेशानी और प्रबंधन की आर्थिक दिक्कतों को लेकर भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष विमल चोपड़ा और हॉस्पिटल बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सुरेंद्र शुक्ला कई बार स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तक से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने भुगतान में हो रही देरी से उत्पन्न गंभीर स्थिति से सरकार को अवगत कराया है। हालांकि, अब तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
आंकड़ों में आयुष्मान योजना (Ayushman Yojana Payment Crisis) की स्थिति
प्रदेश में 600 से ज्यादा निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से इलाज
700 से अधिक सरकारी अस्पतालों में भी योजना के तहत इलाज
फिलहाल करीब 200 छोटे-मंझोले निजी अस्पताल आयुष्मान मरीजों को लौटा रहे हैं
रात के समय इमरजेंसी में फ्री इलाज लगभग बंद
रात की इमरजेंसी में बढ़ी सबसे ज्यादा परेशानी
निजी अस्पतालों का भुगतान अटकने से सबसे ज्यादा दिक्कत रात के समय इमरजेंसी सेवाओं में सामने आ रही है। खासतौर पर शहरों के आउटर इलाकों और दूर-दराज के क्षेत्रों में तबियत बिगड़ने पर मरीजों को निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में गरीब परिवारों को तत्काल इलाज के लिए अपनी जेब से भुगतान करना पड़ रहा है। इस गंभीर स्थिति की जानकारी भी चिकित्सा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री को दी है।
पहले भी अटक चुका है बड़ा भुगतान
यह पहली बार नहीं है जब आयुष्मान योजना के भुगतान को लेकर संकट खड़ा हुआ हो। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी निजी अस्पतालों का करीब 1200 करोड़ रुपए का भुगतान अटक गया था। उस समय चुनावी प्रक्रिया के कारण स्थिति और बिगड़ गई थी। कांग्रेस शासनकाल में जुलाई–अगस्त 2023 से भुगतान रुका हुआ था। नवंबर में चुनाव हुए और सत्ता परिवर्तन के चलते मामला और उलझ गया। उस दौरान भी कई निजी अस्पतालों ने इलाज बंद कर दिया था। बाद में भुगतान हुआ, लेकिन अब फिर वही हालात बनते नजर आ रहे हैं।


