मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी में इस बार पर्यावरण और उद्योग से जुड़े मुद्दों पर ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। (Bamboo Summit Mumbai) के तहत 18 और 19 सितंबर को यशवंतराव चव्हाण केंद्र में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के समझौते (MoU) होने की संभावना है, जो बैंबू आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर खोलेंगे।
क्यों अहम है Bamboo Summit Mumbai
यह पहला मौका है जब महाराष्ट्र इस तरह का अंतरराष्ट्रीय स्तर का बैंबू सम्मेलन आयोजित कर रहा है। आयोजन की जिम्मेदारी राज्य सरकार के थिंक टैंक MITRA और फीनिक्स फाउंडेशन ने मिलकर उठाई है। इस समिट में किसान, वैज्ञानिक, उद्योगपति और पॉलिसी मेकर शामिल होंगे, जो बांस (Bamboo) से बनने वाले बायोफ्यूल, फर्नीचर, टेक्सटाइल और निर्माण क्षेत्र की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। (Bamboo Summit Mumbai)
बांस: पर्यावरण संकट का समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंबू या बांस को “कल्पवृक्ष” कहा जा सकता है क्योंकि यह मिट्टी और हवा दोनों को संजीवनी देने का काम करता है। यह कार्बन को तेजी से सोखता है, वनों की कटाई पर अंकुश लगाता है और इथेनॉल, मेथनॉल व अन्य बायोफ्यूल के उत्पादन में अहम भूमिका निभा सकता है। (Bamboo Summit Mumbai) पर चर्चा का यह एक मुख्य बिंदु होगा।
बड़े नेता और उद्यमी होंगे शामिल
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कई केंद्रीय नेता शामिल होने वाले हैं। इनके साथ ही बैंबू इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों, अंतरराष्ट्रीय रिसर्चरों और नीति-निर्माताओं की मौजूदगी इसे खास बना रही है। पहले दिन ऑक्सीजन पार्क और ग्रीन बिल्डिंग (Green Building) जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा, जबकि दूसरे दिन उद्योगपतियों और सरकार के बीच राउंडटेबल बैठक रखी गई है।
20 हजार करोड़ रुपये के समझौते
दूसरे दिन का सेशन निवेशकों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच समझौते पर केंद्रित होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के MoU पर हस्ताक्षर होंगे। इन निवेशों से न केवल बैंबू इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी बल्कि किसानों को भी सीधा लाभ होगा। (Bamboo Summit Mumbai)
भविष्य की दिशा
(Bamboo Summit Mumbai) सिर्फ एक उद्योगिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय और सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक है। बांस आधारित उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती देंगे और शहरी क्षेत्रों में ग्रीन प्रोजेक्ट्स की नींव रखेंगे। विश्लेषकों के अनुसार, अगर इस समिट से जुड़े प्रोजेक्ट सफल होते हैं तो आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र और भारत दोनों को सतत विकास की नई राह मिलेगी।


