सीजी भास्कर, 09 जनवरी। पड़ोसी देश बांग्लादेश में लगातार बिगड़ते हालात का असर अब भारत की सीमा सुरक्षा रणनीति पर साफ नजर आने (Bangladesh Crisis News) लगा है। संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है,
वहां सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करते हुए 12 फीट ऊंची कंसर्टीना फेंसिंग लगाने का काम शुरू कर दिया है। यह इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही संकरा भू-भाग भारत के मुख्य भूभाग को आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
किन इलाकों में बढ़ाई गई सुरक्षा?
बीएसएफ की यह नई फेंसिंग और निगरानी व्यवस्था पश्चिम बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों के उन क्षेत्रों में लागू की जा रही है, जिन्हें सुरक्षा एजेंसियां पहले से संवेदनशील (Bangladesh Crisis News) मानती रही हैं। इस क्षेत्र की चौड़ाई करीब 20 से 40 किलोमीटर के बीच है, लेकिन रणनीतिक महत्व देश की सुरक्षा में बेहद बड़ा है।
हाईटेक निगरानी का जाल
सीमा पर 24 घंटे गश्त
अतिरिक्त फ्लड लाइट्स की व्यवस्था
थर्मल कैमरों से रात में निगरानी
ड्रोन के जरिए सीमावर्ती गतिविधियों पर नजर
इन उपायों का मकसद घुसपैठ, तस्करी और अवैध आवाजाही को रोकना है।
खुफिया इनपुट के बाद बढ़ी चौकसी
खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के अनुसार बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा के बाद असामाजिक तत्वों और शरणार्थियों की सीमा पार गतिविधियों की आशंका बढ़ गई है। बीते कुछ समय में सीमावर्ती इलाकों में असामान्य हलचल देखी गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
क्यों अहम है ‘चिकन नेक’?
भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी रास्ता
सामरिक और लॉजिस्टिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील
किसी भी अस्थिरता का सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर
सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग
बीएसएफ का क्या कहना है?
बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि नई कंसर्टीना फेंसिंग एक सक्रिय सुरक्षा कवच के रूप में काम (Bangladesh Crisis News) करेगी। इससे न केवल संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई संभव होगी, बल्कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने में सुरक्षा बलों को बढ़त मिलेगी।
अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह कदम सीमाओं की प्रभावी रक्षा और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में जरूरी था।


