सीजी भास्कर, 17 फरवरी। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के साथ प्रधानमंत्री के रूप में तारिक रहमान ने शपथ (Bangladesh New Cabinet) ले ली है। उनके मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देते हुए एक हिंदू और एक बौद्ध नेता को मंत्री पद दिया गया है।
नई सरकार में हिंदू समुदाय से निताई रॉय चौधरी और बौद्ध समुदाय से दीपेन दीवान चकमा ने मंत्री पद की शपथ ली। यह कदम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हालिया आम चुनावों में अल्पसंख्यक समुदाय के चार उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।
कौन हैं निताई रॉय चौधरी?
निताई रॉय चौधरी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) से जुड़े वरिष्ठ नेता हैं। वे देश के हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और हालिया संसदीय चुनाव में जीत हासिल (Bangladesh New Cabinet) कर संसद पहुंचे। राजनीतिक हलकों में उन्हें संगठनात्मक पकड़ और जमीनी संपर्क के लिए जाना जाता है।
कौन हैं दीपेन दीवान चकमा?
दीपेन दीवान चकमा बौद्ध समुदाय से आने वाले नेता हैं और चटगांव हिल ट्रैक्ट्स क्षेत्र से उनका संबंध बताया जाता है। वे लंबे समय से क्षेत्रीय मुद्दों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े रहे हैं।
चार अल्पसंख्यक नेताओं की जीत
आम चुनाव में दो हिंदू (गायेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी) तथा दो बौद्ध (सचिन प्रू और दीपेन दीवान चकमा) उम्मीदवार विजयी हुए थे। इनमें से एक हिंदू और एक बौद्ध नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। चारों नेता Bangladesh Nationalist Party (BNP) से जुड़े हैं।
शपथ ग्रहण समारोह परंपरा से हटकर जातीय संसद के साउथ प्लाजा में आयोजित (Bangladesh New Cabinet) किया गया, जहां राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने प्रधानमंत्री और मंत्रियों को पद की शपथ दिलाई। विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देना नई सरकार की समावेशी छवि को मजबूत करने का प्रयास है।





